उत्तराखंड मे आर्थिक संकट से निपटने के लिए रोडवेज उठाया ये बडा कदम, यहां देखे

देहरादून:कोरोना की वजह से गहरे आर्थिक संकट में फंसे उत्तराखंड रोडवेज को राहत देने के लिए मंगलवार को कुछ बड़े कदम उठाए गए। परिवहन निगम बोर्ड ने बसों की आयु सीमा दो साल बढ़ा दी है। साथ ही कुछ संपत्तियों के कॉमर्शियल इस्तेमाल और आमदनी बढ़ाने के लिए नए प्रयोग करने को भी मंजूरी दी गई। ट्रांसपोर्टनगर की वर्कशॉप में दो हजार वर्गमीटर जमीन गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया को देने पर भी सहमति बनी।

रोडवेज प्रबंधन से आर्थिक संकट से उबरने के लिए सरवाइवल प्लान बनाने को भी कहा गया है। हालांकि कर्मचारियों के लिहाज से यह बोर्ड बैठक झटका देने वाली साबित हुई है। मृतक आश्रित श्रेणी में नियमित की बजाय संविदा आधार पर नियुक्तियां की जाएंगी। वेतन कटौती को यथावत रखने का भी निर्णय लिया गया।

सचिवालय में बोर्ड की अध्यक्ष एसीएस राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में करीब दो घंटे तक चली बैठक में रोडवेज की आर्थिक स्थिति पर विस्तार से मंथन किया गया। इस बैठक में रोडवेज एमडी रणवीर सिंह चौहान भी रहे। इधर, जीएम दीपक जैन ने कहा कि बोर्ड ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। चूंकि बसों का संचालन नहीं हो पा रहा है, इसलिए फिलहाल कर्मचारियों को श्रम विभाग की दरों से ही मानदेय देने का निर्णय किया गया है।

रोडवेज को राहत
-वाहन के कंडम होने की आयु पहाड़ पर छह की बजाय सात और मैदानी रूट पर अब आठ साल होगी
-छह लाख किमी की बजाय लगातार आठ लाख किमी चलने के बाद ही बस को ऑफ रूट किया जाएगा
-यूपी से संपत्ति बंटवारे में 28 करोड़ के विवाद में सुप्रीम कोर्ट में रोडवेज को कैविएट दाखिल करने की मंजूरी

कार्मिकों को झटका
-मृतक आश्रित को स्थायी नियुक्ति की जगह संविदा से नियुक्ति मिलेगी
-संविदा/विशेष श्रेणी के ड्राइवर और कंडक्टर को श्रम विभाग की दरों से न्यूनतम 9,124 रुपये वेतन मिलेगा
-वित्तीय संकट के कारण रोडवेज के अधिकारी और कर्मचारियों के बाकी भत्तों में की गई कटौतियां फिलहाल यथावत रहेंगी

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