उत्तराखंड में BJP अध्यक्ष समेत 13 MLAs ने करवाई महज 9000 की वेतन कटौती

देहरादून: कोरोना काल में उत्तराखंड के विधायकों के वेतन भत्ते को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है. प्रदेश सरकार ने कोरोना से उपजे हालातों से पार पाने के लिए मंत्रियों, विधायकों के वेतन से 30 फीसदी की कटौती का फैसला लिया है, लेकिन बीजेपी के ही 13 विधायकों ने अपने वेतन भत्ते में कटौती नहीं की है, जिसके बाद कांग्रेस पार्टी त्रिवेंद्र सरकार पर हमलावार हो गई है और बीजेपी विधायकों पर कंजूसी करने का आरोप लगाया है.

महज 9 हजार की कटौती करवाने वालों में BJP प्रदेश अध्यक्ष भी शामिल
एक विधायक की महीने की सैलरी में से ₹57 हजार 600 की कटौती होनी है, लेकिन भाजपा के 57 में से 46 विधायकों ने 3 महीने में निर्धारित कटौती से कम की धनराशि दी है, जबकि 13 विधायकों ने तो सिर्फ ₹9000 की कटौती कराई है. इसमें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत भी शामिल हैं.

BJP विधायक वेतन कटौती में दिखा रहे कंजूसी: कांग्रेस
केदारनाथ से कांग्रेस विधायक मनोज रावत का कहना है कि नेता सदन होने के नाते मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र के कहने पर मंत्रियों और विधायकों को अपने वेतन में कटौती करनी चाहिए थी, लेकिन दुर्भाग्य है कि कोरोना काल में भाजपा विधायक खुद वेतन और भत्ते से कटौती करने में कंजूसी दिखा रहे हैं. मनोज रावत का दावा है कि बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस विधायकों ने एक जुटता देखते हुए अपने-अपने वेतन भत्ते से कटौती करवा दी है.

मुख्यमंत्री ने किया अपने विधायकों का बचाव
वेतन कटौती न करने के मामले में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने विधायकों का बचाव किया है, उन्होंने कहा कि शायद कुछ कंफ्यूजन रहा होगा, जिसे दूर कर लिया जाएगा. सीएम रावत ने विश्वास जताया कि सभी मंत्री-विधायक अपने वेतन-भत्तों में कटौती करेंगे. वहीं, सबसे पहले वेतन में कटौती करवाने वाली मसूरी विधायक गणेश जोशी ने भी साथी विधायकों से अपील की है कि वो कोरोना काल में अपने वेतन भत्ते में कटौती जरूर करवाएं.

big news

loading…