उत्तराखंड में गंगा को स्वच्छ बनाने की मुहिम पकड़ रही जोर, 76 फीसद सीवेज प्लांट बनकर तैयार

देहरादून। नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत गोमुख से लेकर गंगा सागर तक गंगा नदी को स्वच्छ बनाने की मुहिम उत्तराखंड में जोर पकड़ रही है। गंगा के पानी को स्वच्छ बनाने के लिए विशेषकर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किए जा रहे हैं। ताकि सीवर को गंगा में न उड़ेला जा सके। अच्छी बात यह है कि उत्तराखंड में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के 34 में से 26 प्रोजेक्ट तैयार हो चुके हैं। शेष पर तेज गति से काम चल रहा है।

नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा प्रोजेक्ट के तहत 34 नगरों में 16.55 करोड़ लीटर (165.50 एमएलडी/मिलियन लीटर डेली) सीवर का रोजाना निस्तारण करने वाली क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने हैं। इनमें से 15.31 करोड़ लीटर (153.17 एमएलडी) क्षमता के प्लांट तैयार किए जा चुके हैं। सीधा मतलब है कि इतना सीवर अब गंगा या उसकी सहायक नदियों में मिलने की जगह प्लांट में शोधित हो रहा है। इसका असर यह हुआ कि गंगा नदी का पानी अब पहले की तुलना में साफ हो गया है।

नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत हरिद्वार नगर निगम को 72 घाटों की सफाई (संसाधन विकसित करने समेत) का जिम्मा दिया गया है। 15.90 करोड़ रुपये की परियोजना को तीन साल में पूरा करना था और इसका काम अंतिम चरण में है।

गंगा व उसकी सहायक नदियों के किनारे बसे 222 गांवों को नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत ओडीएफ (खुले में शौच मुक्ति) का दर्जा मिल चुका है। इन गांवों में 9540 व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण किया गया है।

यहां बन चुके हैं प्‍लांट

बदरीनाथ (दो प्रोजेक्ट), देवप्रयाग (तीन प्रोजेक्ट), जोशीमठ (एक प्रोजेक्ट), गोपेश्वर (एक प्रोजेक्ट), कर्णप्रयाग (एक प्रोजेक्ट), ऋषिकेश (एक प्रोजेक्ट), तपोवन-टिहरी (दो प्रोजेक्ट), हरिद्वार (छह प्रोजेक्ट), गंगोत्री (दो प्रोजेक्ट), उत्तरकाशी (दो प्रोजेक्ट), कीर्तिनगर (एक प्रोजेक्ट), श्रीनगर (दो प्रोजेक्ट), नंदप्रयाग (एक प्रोजेक्ट), स्वर्गाश्रम (एक प्रोजेक्ट)।

जोशीमठ (एक प्रोजेक्ट), चमोली (एक प्रोजेक्ट), ऋषिकेश (एक प्रोजेक्ट), रुद्रप्रयाग (एक प्रोजेक्ट), मुनिकीरेती (एक प्रोजेक्ट), देहरादून (एक प्रोजेक्ट), रामनगर (एक प्रोजेक्ट), श्रीकोट (एक प्रोजेक्ट)।

उत्तराखंड में 41 घाट बनकर तैयार
नमामि गंगे के तहत उत्तराखंड में घाट निमार्ण के सभी सात प्रोजेक्ट पूरे कर दिए गए हैं। प्रोजेक्ट के तहत 20 घाट व 21 अंतिम संस्कार वाले स्थल/घाट का निर्माण किया जाना था। 121.07 करोड़ रुपये की इस परियोजना के पूरे हो जाने से गंगा स्वच्छता को बल मिला है।

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