मेरठ पुलिस ने संघ कार्यकर्ता को घर में घुसकर पीटा, फिर आधा किलोमीटर घसीटा, वीडियो वायरल

मेरठ। मेडिकल पुलिस पर आरोप लगे हैं कि उसने जागृति विहार सेक्टर-7 में लोगों से गालीगलौज की। भाजपा नेता व संघ कार्यकर्ता राजेंद्र कुमार ने इसका विरोध किया तो पुलिस ने उन्हें घर में घुसकर पीटा। इसके बाद संघ कार्यकर्ता को घर से घसीटते हुए आधा किलोमीटर तक बेइज्जत किया। इसका वीडियो भी वायरल हो गया। 
मेडिकल क्षेत्र का जागृति विहार सेक्टर-7 हॉटस्पॉट इलाका है। आरोप है कि मेडिकल थाने के दरोगा और दो पुलिसकर्मी बृहस्पतिवार को लोगों से सरेआम गालीगलौज करते जा रहे थे। कुछ महिलाओं ने विरोध भी जताया। लेकिन पुलिसकर्मी नहीं माने। इस दौरान सेक्टर-7 निवासी संघ कार्यकर्ता राजेंद्र कुमार ने विरोध किया। आरोप है कि दरोगा और सिपाहियों ने उनसे गालीगलौज करते हुए उनका पीछा किया। संघ कार्यकर्ता अपने घर में घुस गए तो आरोपी पुलिसकर्मियों ने घर में घुसकर उनसे मारपीट की। यही नहीं, जबरन घसीटते हुए सड़क पर ले आए। लोग तमाशबीन बने रहे और मकान की छतों से ही देखते रहे। 
इस बीच किसी ने अपने मोबाइल से वीडियो बना लिया। जिसमें संघ कार्यकर्ता की पत्नी और बेटी विरोध जता रही हैं। वायरल वीडियो में दरोगा और अन्य दोनों पुलिसकर्मी संघ कार्यकर्ता की सरेआम बेइज्जती कर रहे हैं और उन्हें मारपीट करते हुए ले जाया जा रहा है। पीड़ित संघ कार्यकर्ता ने बताया कि मुझे करीब आधा किलोमीटर तक बेइज्जत करके ले गए थे। जबकि मैं 22 साल से आरएसएस से जुड़ा हुआ हूं। बाद में आसपास के लोगों ने विरोध करते हुए हंगामा किया तो पुलिस ने चेतावनी देकर छोड़ दिया। पीड़ित का कहना है कि सिपाही और दरोगा ने धमकी दी है यदि किसी भी अधिकारी से शिकायत की तो इस बार सीधे जेल ही भेज देंगे। यह वीडियो 54 सेकंड का है। पीड़ित संघ कार्यकर्ता ने बताया कि उन्होंने इसकी सूचना भाजपा महानगर अध्यक्ष, दक्षिण विधायक और सांसद को दे दी है। वहीं, आसपास के लोगों ने बताया कि हंगामा होने पर एसओ मेडिकल भी पहुंच गए थे। वहीं, एसओ मेडिकल कुलवीर सिंह का कहना है कि संघ नेता के साथ पुलिस ने कोई मारपीट की है या नहीं, इसकी कोई जानकारी नहीं है। 
मेडिकल पुलिस की मनमानी का यह पहला मामला नहीं है। करीब आठ माह पहले सीआरपीएफ के कमांडो सतेंद्र सिंह को घर में घुसकर मेडिकल पुलिस ने पीटा और घर में तोड़फोड़ कर मोबाइल लूट के मामले में कमांडो को ही जेल भेज दिया था। मामला गृह मंत्रालय तक पहुंचा तो अफसरों ने कमांडो पर दर्ज मुकदमे में लूट की धारा हटवाकर रात में ही जमानत दिलवा दी थी। बाद में इंस्पेक्टर मेडिकल प्रशांत मिश्रा पर गाज गिरी थी। उसमें भी दो दरोगाओं की मनमानी सामने आई थी।

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