बडी खबरः यूपी में घोटालेबाज अफसरों की संपत्ति से होगी रकम वसूली

अंबेडकरनगर। अंबेडकरनगर जिले के विकास खंडों में तैनात रहने के दौरान कंटीजेंसी मद में घोटाला करने वाले एडीओ पंचायत और प्रभारी एडीओ पंचायतों पर डीएम ने कड़ा शिकंजा कसा है। घोटालेबाज अधिकारियों की निजी संपत्ति से घोटाले की राशि वसूली जाएगी।

जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्रा प्रमुख सचिव पंचायती राज को पत्र भेजते हुए इसकी संस्तुति की है। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई, डीपीआरओ को निलंबित करने और खंड विकास अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की है।

जिले के साथ विकास खंडों में 14वें वित्त आयोग के कंटीजेंसी मद में लगभग पौने दो करोड रुपए का घोटाला सामने आने के बाद जिले के एक दर्जन से अधिक एडीओ पंचायत और प्रभारी एडीओ पंचायत (ग्राम पंचायत अधिकारी) के खिलाफ गबन का मुकदमा दर्ज कराया गया है।

आरोप है कि एडीओ पंचायत ने अपने पद पर रहने के दौरान शासनादेश का उल्लंघन करते हुए कंटीजेंसी मद के खाते का संचालन एकल कर लिया। जबकि शासनादेश था कि खंड विकास अधिकारी और एडीओ पंचायत संयुक्त रूप से इस खाते का संचालन करेंगे। मामले की जानकारी मिलने के बाद सबसे पहले कटेहरी विकासखंड के तीन एडीओ पंचायत खिलाफ 96 लाख रुपए गबन का मुकदमा जिला विकास अधिकारी ने दर्ज कराया।

इसके बाद जिले के अन्य विकास खंडों में भी संबंधित एडीओ पंचायत खिलाफ गबन का मुकदमा खंड विकास अधिकारियों ने अपने बचाव में दर्ज करा दिया। इसमें अब तक किसी की गिरफ्तारी पुलिस विभाग नहीं कर सका।

इस बीच जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्र के प्रमुख सचिव पंचायती राज को भेजे गए पत्र से प्रशासनिक हलके में खलबली मचा दी है। डीएम ने घोटाले पर कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी एडीओ पंचायत की निजी संपत्ति घोटाले की धनराशि वसूलने की संस्तुति करते हुए शासन को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि इस मामले में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। जिलाधिकारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी राम अशीष चौधरी के खिलाफ भी शासन को पत्र लिखते हुए उन्हें निलंबित करने की संस्तुति की है। साथ ही इनके विरुद्ध अनुशासनात्मक जांच भी बैठाने की भी संस्तुति की है।

आरोप है कि जिला पंचायत राज अधिकारी ने कटेहरी विकासखंड में बृजेश कुमार सिंह को एडीओ पंचायत तैनात करने के दौरान जिलाधिकारी से अनुमोदन नहीं लिया। जबकि बृजेश कुमार सिंह कटेहरी विकास खंड में 10 वर्षों तक ग्राम पंचायत अधिकारी के रूप में तैनात रह चुके थे। सीडीओ से अनुमोदन लेकर तैनाती कर दी। डीएम ने इसे और अनुशासनहीनता और पदीय दायित्वों के प्रति लापरवाही माना है। इसके साथ ही डीएम ने शासनादेश के अनुपालन ना करने कारण गबन की स्थिति उत्पन्न होने पर खंड विकास अधिकारियों को भी दोषी माना है।

उन्होंने उस समय तैनात खंड विकास अधिकारियों के खिलाफ भी अनुशासनिक कार्रवाई प्रस्तावित की है। इसके साथ है उन्होंने 14वें वित्त आयोग के प्रशासनिक मद की धनराशि के आहरण एवं व्यय की कोई समीक्षा ना किए जाने के लिए मुख्य विकास अधिकारी को भी दोषी मानते हुए अनुशासनिक कार्यवाही की संस्तुति की है।

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