डीएसपी से घर जाने की इजाजत लेने गई थी, हवलदार बनकर वापस लौटी यह बेटी

संगरूर। नायक फिल्म में फिल्म अभिनेता अनिल कपूर ने एक दिन का सीएम बन प्रशासन को काम करने का सलीका सिखाया था, लेकिन गत दिवस शामली उत्तर प्रदेश की अंशू उपाध्याय ने एक दिन की हवलदार बन पलायन कर रहे श्रमिकों से संवेदना जताई और पैदल घर न जाने की भावुक अपील की। बकौल डीएसपी बूटा सिंह गिल अंशू की अपील की असर दिखा।
पंजाब लहरागागा पुलिस की श्रमिकों को रोकने के लिए की इस अनोखी पहल के तहत एसडीएम काला राम व डीएसपी बूटा सिंह गिल ने अंशू उपाध्याय को एक दिन के लिए हवलदार बनाया। अंशू को पुलिस की वर्दी मुहैया करवाई गई। पुलिस की वर्दी में अंशू ने पुलिस मुलाजिमों के साथ मिलकर बाजार में बाहरी राज्यों के मजदूरों से अपील की कि वह पैदल, साइकिल या किसी भी अन्य साधन से अपने इलाके को छोड़कर न जाएं। अंशू ने कहा, ऐसा करने से उन्हें सफर में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। पंजाब सरकार ने सभी दुकानें, कारखाने, बाजार, फैक्ट्रियां सहित हर काम धंधे को खोलने की इजाजत दे दी है, इसलिए वह घर जाने के बजाय दोबारा अपने काम धंधे पर लौटें और कोरोना से जंग लड़ जिंदगी को संवारें। आपात स्थिति में घर जाना है तो सरकारी बसों व ट्रेनों का इस्तेमाल ही करें।
यूपी के शामली इलाके की 24 वर्षीय अंशू उपाध्याय कोरोना महामारी फैलने से पहले लहरागागा के नजदीकी गांव गागा में अपने रिश्तेदारों के पास आई थी। कोरोना की दस्तक के साथ सरकार ने कर्फ्यू का एलान कर दिया। ऐसे में अंशू उपाध्याय अपने रिश्तेदारों के पास ही फंस गई थी। कुछ दिन पहले अंशू उपाध्याय अपने घर शामली वापस लौटने के लिए लहरागागा के एसडीएम काला राम के पास पहुंची। एसडीएम ने उससे वापस लौटने का कारण पूछा तो उसने कहा कि कोरोना काल की ऐसी स्थिति में वह यहां से वापस तो नहीं जाना चाहती, लेकिन मजदूरों के पैदल घर लौटने की परेशानी को देखकर बेहद दुखी है। इनको रोकने के लिए कुछ करना चाहती हैं। इस पर एसडीएम के जेहन में यह अनोखी पहल का विचार आया। एसडीएम काला राम ने कहा कि श्रमिक को पंजाब में रहना चाहिए। कुछ दिन और इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन सभी मजदूरों की मेडिकल जांच करने, सरकार से अनुमति लेकर ही उन्हें भेजा जाएगा, इसलिए तब तक सभी श्रमिक दोबारा से अपने रोजगार पर लौट जाएं। डीएसपी बूटा सिंह गिल ने कहा कि अंशू ने बाहरी श्रमिकों बेवजह इलाके से जाने से रोकने की अपील की। इसका मजदूरों पर काफी असर हुआ है। कई श्रमिकों ने यहीं पर रहने का फैसला भी लिया है।

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