रालोद छात्रसभा ने उठाई विश्वविद्यालय परीक्षाएं स्थगित करने की मांग


मुजफ्फरनगर/शामली। जनपद मुजफ्फरनगर व शामली में राष्ट्रीय लोकदल छात्र सभा के पदाधिकारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए कोरोना महामारी के चलते विश्वविद्यालयों की प्रस्तावित परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग की है।
मुजफ्फरनगर में रालोद छात्र सभा के पदाधिकारियों ने आज प्रशासन को ज्ञापन देकर विश्वविद्यालयों की प्रस्तावित परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग उठाई। शामली में राष्ट्रीय लोकदल छात्र सभा के जिलाध्यक्ष दीपक देशवाल के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी जसजीत कौर को सौंपा। जिसमें उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना के कारण पूरे देश में मानव जीवन संकट में है। कोरोना महामारी के कारण सभी व्यक्ति बाहर नहीं निकल पा रहे और लोगों में भय बना हुआ है। जिसके चलते परीक्षाओं में किसी भी प्रकार से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन संभव नहीं है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ा हुआ है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में विभिन्न जिलों से छात्र पढ़ते हैं, जो शहर के विभिन्न मोहल्लों में किराए के मकानों में रहते हैं। लॉकडाउन के बाद सभी छात्र अपने घरों को जा चुके हैं और दोबारा उनके ठहरने का कोई इंतजाम भी नहीं है।कोरोना वायरस के कारण शहर के विभिन्न क्षेत्र कंटोनमेंट के रूप में घोषित किए गए हैं। बाहर से आने वाले छात्रों को आवास की विषम परिस्थिति से जूझना पड़ेगा। जिस कारण विश्वविद्यालय की प्रस्तावित परीक्षाओं को स्थगित किया जाए। इस अवसर पर राजन जावला, दीपक देशवाल, सौरव पवार, हिमांशु आदि मौजूद रहे हैं।

शामली में शिक्षकों का प्रदर्शन

शामली। माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा के पदाधिकारियों ने शामली कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करते हुए विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का मानदेय उपलब्ध कराए जाने की मांग की है।
सोमवार को माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा के जिलाध्यक्ष श्रवण कुमार भार्गव के नेतृत्व में दर्जनों शिक्षकों ने शामली कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करते हुए देश के प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी जसजीत कौर को सौंपा, जिसमें उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा में लगभग 6000 विद्यालयों के सापेक्ष लगभग 22000 सेल्फ फाइनेंस विद्यालय संचालित है। जिसमें लगभग 3 लाख 50 हजार शिक्षक प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा के लगभग 87ः परीक्षार्थियों को शिक्षा देते हैं। यह शिक्षक अपने विद्यालयों में जमा होने वाले शुल्क से वेतन के रूप में बहुत ही कम पारिश्रमिक एवं व्यक्तिगत कोचिंग करके अपने एवं अपने परिवार का भरण पोषण कर पाते हैं, लेकिन पिछले 6 महीनों से विद्यालयों में विभिन्न कारणों से बंद होने और उनमें अध्यापन कर रहे छात्र-छात्राओं के अध्यापन के लिए न आने और लॉक डाउन होने के कारण विद्यालय में फीस न आने से गत मार्च महीने से किसी भी प्रकार का भरण पोषण का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। यह स्थिति कब तक रहेगी यह भी समय के गर्भ में है। ऐसे में शिक्षक एवं कर्मचारी और उनके परिवार ऐसी भीषण आपदा से गुजर रहे हैं, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इस दौरान भी बोर्ड परीक्षा के परिणाम, बोर्ड परीक्षा का कार्य एवं ऑनलाइन परीक्षाओं के संचालन में भी शिक्षकों की सबसे अग्रणी एवं महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रवासी मजदूरों एवं अन्य समस्या ग्रस्त लोगों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जाती रही है, लेकिन शिक्षकों की अनदेखी की गई है। जिस कारण शिक्षक भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 10 जुलाई तक मांग पूरी नहीं की जाती तो शिक्षक उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इस अवसर पर रेणुका भारद्वाज, दिनेश चंद्र शर्मा, वादिल तोमर, नीतू कुमार कश्यप, अनिल कुमार, शिव कुमार आदि मौजूद रहे हैं।

loading…