मुजफ्फरनगर के मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना नजीर अहमद का निधन, शोक में डूबे लोग


मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर के कस्बा जानसठ के मशहूर मुस्लिम धर्म गुरु मुजाहिद-ए-मिल्लत हजरत मौलाना नजीर अहमद कासमी नें मुजफ्फरनगर के गैलेक्सी अस्पताल में सोमवार सुबह 82 वर्षीय मौलाना नें आखिरी सांस ली।
करीब 3 दिन पहले तेज बुखार व शुगर और बीपी का लेवल काफी बढ़नें की वजह से उन्हें मुजफ्फरनगर के अस्पताल में भर्ती किया गया था जहां उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। परिजनों का कहना है कि उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। दूसरी ओर मौलाना के मौत की खबर जैसे ही क्षेत्रवासियों को मिली तो क्षेत्र में गम की लहर दौड़ पड़ी उनके मानने वाले और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। हजरत मौलाना नजीर अहमद कासमी जानसठ में तालीमुल कुरान के नाम से एक बड़ा मदरसा चलाते थे और उनकी प्रसिद्धि का आलम यह था कि इतना बड़ा मदरसा चलाने के बावजूद भी मौलाना को सादगी बेइंतहा पसंद थी और कभी उन्होंने अपने लिए कोई वाहन भी नहीं खरीदा जो भी एक बार मौलाना से मिल लेता था वह उनका कायल हो जाता था मौलाना खासतौर से मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों को शानदार पढ़ाई के साथ साथ एकता व भाईचारे का पाठ पढ़ाते रहते थे। 1992 में बाबरी मस्जिद मामले के मद्देनजर जब हालात गरम हो गए तो तत्कालीन चेयरमैन नगर पंचायत जानसठ को साथ लेकर रात रात भर हिंदू मुस्लिमों के घर-घर जाकर उनको आपसी प्यार मोहब्बत का वास्ता देकर समझाते रहते थे जो आज भी उनकी मिसाल बना हुआ है।
2013 के दंगों के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से उनकी पहले फोन पर वार्ता हुई और उसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आदेश पर एक विशेष चार्टर्ड प्लेन से मौलाना को लखनऊ बुलवाया गया और उनसे लगभग पौन घंटा पूर्व मुख्यमंत्री नें वार्ता की इस वार्ता के दौरान मौलाना नजीर अहमद कासमी काफी सुर्खियों में आ गए थे। हजरत मौलाना नजीर अहमद कासमी मुस्लिम समुदाय में ही नहीं बल्कि काफी हिंदू समुदाय के लोगों के भी प्रिय रहे हैं उनके पास अक्सर हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदाय के लोगों का काफी आना जाना लगा रहता था और मौलाना नजीर अहमद कासमी अक्सर आपसी एकता व भाईचारा की बातें करते हुए नजर आते रहते थे। मौलाना नजीर अहमद कासमी अपने पीछे 4 बेटे मौलाना उस्मान मौलाना लुकमान मौलाना इरफान मौलाना सलमान व तीन बेटियां छोड़ गए हैं। वहीं दूसरी ओर मौलाना के निधन से क्षेत्र का माहौल काफी गमगीन हो गया और उनके मानने वालों के घरों में चूल्हे भी नहीं जल सके मौलाना नजीर के शव को मुजफ्फरनगर अस्पताल से सीधा उनके घर जानसठ लाया गया और फिर उसके बाद लगभग साढे 12 बजे दोपहर को मदरसा तालीमुल कुरान के अहाते में लाये और सवा 2 बजे नमाजे जनाजा के बाद नम आंखों से सुपुर्द ए खाक किया गया ।

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