कोरोना के दौर में ऐसे बनाए रखें अपना मानसिक संतुलन

मुजफ्फरगनर। जैन कन्या डिग्री कॉलेज में समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्षा एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमारी के अनुसार आज जब पूरा विश्व कोविड-19 यानी करोना वायरस महामारी से संघर्ष कर रहा है दुनिया भर की सरकार वैज्ञानिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस महामारी को रोकने में प्रयत्नशील है। इस वैश्विक महामारी से सामान्य जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। पूरे विश्व भर में लोक डाउन चल रहा है व्यक्ति अपने घरों में कैद हो गया है। दुनिया के सामने करोना वायरस की जो वैश्विक महामारी उत्पन्न हुई है वह समाज में लोगों की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रही है, मानसिक स्वास्थ्य को कमजोर कर रही है।हालांकि इस वायरस से बचाव के लिए जागरूकता अभियान के साथ-साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी सामाजिक दूरी यानी सोशल डिस्टेंसिंग को ही इसका एकमात्र उपाय माना है। आज की इस विषम परिस्थिति में व्यक्ति सामाजिक दूरी का अर्थ अलगाव या अकेलापन मान रहा है क्योंकि समाजशास्त्रीय भाषा मेंयह एक मानसिक परिस्थिति है जो पूरी तरह से मानवीय संवेदनापर आधारित होती है। आज हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि इस मानसिक परिस्थिति से उभरने के लिए हम सामाजिक दूरी और अलगाव के अंतर को जाने। सामाजिक दूरी का अर्थ है कि लोग सामूहिक आयोजनों, भीड़-भाड़ और दूसरे लोगों से कम से कम 1 मीटर दूर रहे अर्थात शारीरिक दूरी बनाकर रखें।जबकि सामाजिक अलगाव में व्यक्ति दूसरों से भावनात्मक दूरी बना लेता है व्यक्ति को रिक्तता,खालीपन और सामाजिक संबंधों का अभाव महसूस होने लगता है। यह एक मानसिक परिस्थिति है। अलगाव का एक कारणबदली हुई परिस्थितियों होती है जैसा कि आज की परिस्थिति है। वैश्विक महामारी के इस संकट में लोगों को लग रहा है कि परिस्थितियां उसके नियंत्रण में नहीं हैउसकी इस सोच का परिणाम उसे असहाय महसूस कराता है जिसका सीधा संबंध अवसाद या डिप्रेशन से होता है। भारत जैसे देश में जहां प्राथमिकतापहले परिवार को दी जाती है अगर करोना संक्रमित व्यक्ति कोई गलत जानकारी देखता है, सुनता हैतो वह भय से ग्रसित हो जाता हैउसे लगता है कि उसके कारण उसके परिवार का स्वास्थ्य और उनकी जिंदगी खतरे में न पड़ जाए। अपने परिवार की सुरक्षा के लिए वहअपनी जान लेने की दिशा में भी कदम बढ़ा देता है। इसका एक उदाहरणतो हमें देखने को भी मिला है। यह भी मानसिक परिस्थिति का ही एक रूप है।
आज की इस परिस्थिति में आवश्यक है कि अकेलेपन का एहसास व्यक्ति की सोच पर आधारित है शारीरिक दूरी इसका कारण नहीं है। भले ही आज व्यक्तियों को सामाजिक दूरी बनाए रखने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन अगर परिवार आपसी लगाव, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, फोन इत्यादि जैसे माध्यम अपनाकर एक दूसरे के पास होने का एहसास बनाए रखें तो व्यक्ति अलगाव की इस स्थिति के साथ ही करोना वायरस की इस वैश्विक महामारी जैसे कठिन समय में भी अपना मानसिक संतुलन बनाए रख सकता है।

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