शामली में मस्जिदों पर घूमता रहा ड्रोन, लोगों ने घरों में पढी अलविदा जुमे की नमाज

शामली। लॉक डाउन-4 में माहे रमजान के अलविदा जुमे की नमाज को सहकुशल संपन्न कराये जाने के लिए मुस्लिम बस्तियों में ड्रॉन कैमरों से निगाहबानी की गई, लेकिन सभी लोग अपने अपने घरो मे ही नमाज पढते मिले। पुलिस अधीक्षक ने स्वयं हॉट स्पॉट सैंटरों का निरीक्षण करते हुए लोगों से घरां में रहकर लॉक डाउन का पालन करने के निर्देश दिये है। उन्होने मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों को भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने, मास्क तथा ग्लाउज को पहनने के निर्देश दिये है।
माहे रमजान के अलविदा जुमे की नमाज लॉक डाउन-4 के चलते घरों में ही अदा की गई। शुक्रवार को कोरोना वायरस को फैलने से बचाव को लगाए गए लॉक डाउन में जुमे की नमाज के प्रति पुलिस प्रशासन मुस्तैद दिखाई दिया। पुलिस प्रशासन ने अधिक सर्तकता बरती। पुलिस अधीक्षक विनीत जयसवाल व जिलाधिकारी जसजीत कौर ने शुक्रवार को जनपद के हॉट स्पॉट क्षेत्रों में पहुंचकर जायजा लिया। इसके अलावा शहर कोतवाली पुलिस ने शहर के पंसारियान, बडी माता मंदिर रोड, दिल्ली रोड, तेमुरशाह, अहमदनगर, मोमिननगर, हाजीपुरा, नाला पटरी, काजीवाडा, आजाद चौक, लौहारीगेट, बरखंडी, कलंदरशाह, में ड्रॉन कैमरे से निगाहबानी करते हुए जांच की गई। ताकि इस दौरान कोई व्यक्ति इकटछठा होकर छतो पर नमाज तो नही पढ रहे है। लेकिन किसी भी मौहल्ले से कोई शिकायत नही पाई गई। सभी लोग घरो मे ही नमाज पढते हुए मिले।
माहे रमजान में अलविदा जुमे की नमाज मुस्लिमों ने अपने घरों में रहकर अदा दी। कोरोना महामारी के चलते देश में पहली बार ऐसा हुआ है कि माहे रमजान में मस्जिदों में ताला लगा रहा, और लोगों ने घरों में रहकर इबादत की। मुस्लिमों ने नमाज अदा करते हुए खुदा से देश में अमन चैन कायम करने और कोरोना महामारी से निजात दिलाये जाने की दुआ मांगी है।
शुक्रवार को अलविदा जुमे की नमाज जिलेभर में शांतिपूर्ण तरीके से अदा की गई। कोरोना महामारी के चलते देशभर में लगाए गए लॉक डाउन के चलते मुस्लिमों ने घरों में रहकर जुमे की नमाज अदा की। देश में पहली बार ऐसा हुआ कि माहे रमजान में मस्जिदे बंद रही और मुस्लिमों ने घरों में रहकर खुदा की इबादत की। शुक्रवार को अलविदा जुमे की नमाज मुस्लिमों ने घरों में अदा करते हुए खुदा से देश में अमन चैन कायम करने तथा कोरोना जैसी महामारी से निजात दिलाये जाने की दुआ की। इस दौरान पुलिस मुस्लिम बस्तियों में गश्त करती रही।

शामली के उलेमाओं ने की जरूरतमंदों की मदद की गुजारिश

शामली। शहर के उलेमाओं ने माहे रमजान के मौके पर मुस्लिमों से ईद की शॉपिंग से परहेज करने तथा गरीबों की मदद करने की गुजारिश की है। उन्होने कहा कि लॉक डाउन के वजह से माहे रमजान में बहुत से जरूरतमंद लोगों को परेशानियों हो रही है। जिसकी सदका, फितरा और जकात देकर मदद की जा सकती है।
जमीअत उलेमा-ए हिन्द के सदर मौलाना साजिद ने कहा कि इस बार ईद की शॉपिंग से परहेज किया जाये। घर मे जो भी कपड़े हैं उन्हें ही ईद वाले दिन पहने जाये। ईद की शॉपिंग के पैसों से हम अपने जरूरतमंद पड़ोंसियों, रिशतेदारों और कमजोरों की मदद करना ज्यादा बेहतर होगा। उन्होने सभी से ईद के खर्चो को बचाते हुए असहाय लोगों की मदद करने की गुजारिश की है। मौलाना अयूब ने कहा कि इस बार ईद की नमाज घरों में ही अदा की जायेगी। इसलिए खरीदारी से भी परहेज करते हुए जो लोग असहाय है और किराय के मकानों में रहते है उनका एक महीने का किराया दिया जा सकता है। उनके घरों में महीने भर का राशन दे दिया जाये। सदका और जकात के रूप में उनके बच्चों के स्कूल की फीस जमा करा सकते हैं। बीमारों की दवाईयों का इंतजाम कर सकते हैं। उन्होने सभी से अपने पडौसियों व गली मौहल्लों में रहने वाले असहाय लोगों की मदद करने की गुजारिश की है। शाही इमाम मौलाना शौकीन ने कहा कि जकात और फितरा देने का ये बेहतरीन मौका हम सबको मिला है। उसे दिल खोलकर नेक कामों में खर्च कीजिये और सब पर खर्च कीजिये। हर जरूरतमंद पर खर्च कीजिये। मौजूदा महामारी के चलते हर जगह एक अजीब सी खामोशी और दहशत सी छाई हुई है। सड़कों पर सन्नाटा पसरा पड़ा है। मोहल्लों की चहल-पहल को किसी की बुरी नजर लग गई है। इसलिए फिजूल खर्ची से बचते हुए रूपये को नेक कामों में खर्च करे। जिससे मजलूमों का भला हो सके।
जमीअत उलेमा-ए हिन्द के सदर मौलाना साजिद कासमी ने मुस्लिमों ने लॉक डाउन के कारण ईद उल फितर की नमाज घरों में रहकर अदा करने की अपील की है। उन्होने ईद की नमाज का तरीका बताते हुए कहा कि सदकतुल फितर भी ईद की नमाज से पूर्व ही अदा का लिया जाये। शुक्रवार को जमीअत उलेमा-ए हिन्द के सदर मौलाना साजिद ने कहा कि इस बार ईद-उज फितर की नमाज देशभर में लागू किए गए लॉक डाउन के कारण घरों में ही अदा की जायेगी। देश में कोरोना महामारी फैली हुई है, जिसको लेकर देश में लॉक डाउन घोषित है, जिसका सभी को पालन करना है। उन्होने कहा कि ईद की नमाज घरों में ही सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए चार व्यक्ति एक साथ अदा कर सकते है। जिसमें दो रकात नमाज वाजिद माह छह तकबीरों के अदा की जायेगी। ईद की नमाज के बाद खुतबा पढना और सुन्ना सुन्नत है। अगर आप नही पढ सकते है तो आपकी ईद की नमाज हो जायेगी। ईद की नमाज अदा न करने की स्थिति में चार रकात चाश्त भी पढी जा सकती है, जो सवेरे 6 बजे से दोपहर 11 बजे के बीच अदा कर ली जाये। उन्होने कहा कि सदकतुल फितर हर मुसलमान पर फर्ज है, जिसको ईद की नमाज से पहले पहले अदा कर लिया जाये। इस बार 30-40 रूपये सदकतुल फितर एक व्यक्ति के हिस्से में आते है। जबकि मुस्लिमों को जकात भी अदा कर लेनी चाहिए। उन्होने सभी से लॉक डाउन के नियमों का पालन करते हुए ईद उल फितर घरों में रहकर मनाए जाने की गुजारिश की है।

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