मध्यप्रदेश में नदी खतरे के निशान से 11 फीट ऊपर, हाई अलर्ट जारी

श्योपुर : मालवा की बारिश से श्योपुर जिले की चंबल और पार्वती नदियों में बाढ़ आ गई है। पार्वती नदी खतरे के निशान से 10 फीट ऊपर चला गया है। चंबल नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है। सोमवार को कलेक्टर, एसपी व एसडीएम नदियों किनारे बसे गांव, पुल व मुख्य रास्तों का दौरा करने पहुंचे। जिले में पिछले साल की तुलना में 65 फीसद ही बारिश हुई है।

अल्पवर्षा के कारण अधिकांश तालाब, डैम व बांध खाली पड़े हैं, लेकिन मालवा क्षेत्र में हो रही लगातार बारिश के कारण यहां हालात खराब हो रहे हैं। सोमवार की शाम तक पार्वती का जलस्तर खतरे के निशान 197 मीटर से तीन मीटर ऊपर 200 मीटर तक जा पहुंचा है। पार्वती नदी का पानी चंबल नदी में मिल रहा है और राजस्थान के कोटा बैराज से 1.50 लाख क्यूसेक तक पानी छोड़ा गया। इससे चंबल नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।

सोमवार की शाम तक चंबल का जलस्तर 195 मीटर पर जा पहुंचा। चंबल का खतरे का निशान 199 मीटर पर है। कोटा को जोड़ने वाले खातौली पुल पर 22 फीट व कुहांजापुर पुल पर छह फीट से ज्यादा पानी था। अनुमान है कि चंबल नदी भी खतरे के निशान को पार कर जाएगी क्योंकि पार्वती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और कोटा-बैराज से चंबल नदी में पानी छोड़ने का क्रम अभी जारी रहेगा।

पार्वती नदी के उफान में नदी के बीचोंबीच बसे सूंडी गांव में 75 परिवार नदी की बाढ़ से घिरे हुए हैं। उ;घळर्-ऊि्‌झ।र चंबल नदी की बाढ़ में सांड़ गांव भी पानी से घिर गया है। रविवार की दोपहर से सांड गांव टापू बना गया। इस गांव में 250 से ज्यादा आबादी है।

श्योपुर का राजस्थान के खातौली, कोटा, बारां, मांगरौल, झालावाड़ आदि शहरों से संपर्क कटा हुआ है। इसी तरह चंबल नदी किनारे खेतों पर घर बनाकर रह रहे लोगों से घर खाली कराए जा रहे हैं। प्रशासन ने 35 गांवों में बाढ़ का अलर्ट जारी कर दिया है। एसडीआरएफ की टीम पहुंची नदियों का जलस्तर चिंताजनक स्तर तक बढ़ने पर एसडीआरएफ की 17 सदस्यीय टीम ने सोमवार की सुबह ही श्योपुर में आमद दे दी। प्रशासन ने सेना के लिए उप्र के बवीना केंट में संदेश भेजा गया है तो एनडीआरएफ की टीम के लिए भोपाल से मदद मांगी गई है।

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