मंत्रिमंडल विस्तार: इन 10 विधायकों को लेकर मुश्किल में भाजपा, किसे बनाए मंत्री, और…

भोपाल. मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार तो बन गई लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को फिलहाल अपनी मिनी कैबिनेट से काम चलाना पड़ रहा है। क्योंकि लॉकडाउन के कारण मध्यप्रदेश में कैबिनेट का विस्तार नहीं हो रहा है। वहीं, कैबिनेट विस्तार को लेकर ये भी कहा जा रहा है कि सिंधिया खेमे के कारण जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण बिगड़ रहा है। कहा जा रहा है कि 17 मई के बाद शिवराज कैबिनेट का विस्तार हो सकता है। इस विस्तार में करीब 24 नेता मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। माना जा रहा है कि इस विस्तार में ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के 8 नेता शामिल हो सकते हैं जिस कारण से भाजपा के कई दावेदार बाहर हो सकते हैं। ऐसे में भाजपा को मुश्किलों को सामना करना पड़ सकता है।
कैबिनेट विस्तार को लेकर सबसे बड़ी मुश्किलें 5 जिलों को है। सागर, रीवा, ग्वालियर, मंदसौर और इंदौर में जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण बैठने में भाजपा को दिक्कत हो रही है। शिवराज कैबिनेट से अभी गोविंद सिंह राजपूत मंत्री हैं। गोविंद सिंह राजपूत सागर जिले से आते हैं और उन्हें उपचुनाव भी लड़ना है। वहीं, सागर जिले से वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव भी आते हैं। पूर्व गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह भी सागर जिले से आते हैं। इसके अलावा प्रदीप लारिया एससी कोटे से और शैलेन्द्र जैन, जैन समाज के कोटे से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। जिस कारण से भाजपा को सामंजस्य बैठाने में मुश्किल हो रही है।
पूर्व मंत्री राजेन्द्र शुक्ल, शिवराज सिंह चौहान के करीबी माने जाते हैं और विंध्य क्षेत्र में भाजपा के बड़े चेहरे हैं। राजेन्द्र शुक्ल के अलावा, नागेन्द्र सिंह, गिरीश गौतम और दिव्यराज सिंह बड़े दावेदार हैं। राजेन्द्र शुक्ल के सामने मुश्किल ये है कि ब्राह्मण चेहेरे के रूप में नरोत्तम मिश्रा को कैबिनेट में जगह मिल चुकी है जबकि गोपाल भार्गव प्रबल दावेदार हैं।इंदौर जिले में तुलसी सिलावट अभी मंत्री हैं। उनके अलावा, ऊषा ठाकुर, मालिनी गौड़ और रमेश मेंदोला भी दावेदार हैं। ऐसे में अगर किसी एक को मंत्री बनाया जाता है तो नाराजगी बढ़ सकती है। वहीं, मंदसौर जिले में हरदीप सिंह डंग के मंत्री बनने से जगदीश देवड़ा, यशपाल सिंह सिसौदियाा और ओमप्रकाश सकलेचा जैसे बड़े दावेदार हैं। ग्वालियर-चंबल से प्रद्युमन सिंह तोमर के अलावा इमरती देवी और यशोधरा राजे सिंधिया भी प्रबल दावेदार हैं।
मध्यप्रदेश में 230 विधानसभा सीटे हैं। इस हिसाब से मध्यप्रदेश में केवल 34 मंत्री बन सकते हैं। ये माना जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार में ज्योतिरादित्य सिंधिया के 8 नेता और मंत्री बन सकते हैं जबकि 2 मंत्री बनाए जा चुके हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के नेताओं की बात करें तो उन्के खेमे से इमरती देवी, प्रद्युमन सिंह तोमर, प्रभुराम चौधरी, महेन्द्र सिंह सिसौदिया के अलावा, बिसाहूलाल साहू, राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, एंदल सिंह कंसाना और हरदीप सिंह डंग को मंत्री बनाया जा सकता है। जबकि तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत पहले से ही शिवराज कैबिनेट में मंत्री हैं। मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि भाजपा के कई नेता उनके संपर्क में हैं। वहीं, दूसरी तरफ शिवराज सरकार के पूर्व मंत्री दीपक जोशी भी बागी तेवर दिखा चुके हैं। उन्होंने हाल ही में बयान दिया है कि मेरे पास सभी विकल्प खुले हैं और समय आने पर इन विकल्पों का प्रयोग करूंगा। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भाजपा को फूट का भी डर है क्योंकि मध्यप्रदेश में अभी किसी भी पार्टी के पास पूर्णबहुमत नहीं है। जबकि 24 सीटों पर उपचुनाव होने हैं।

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