एमपी में इस बार देरी से दस्तक देगा मानसून, जानिए वजह…

भोपाल. मौसम इस बार मध्य प्रदेश के लिए चिंताजनक खबर दे रहा है. मौसम विभाग कह रहा है कि इस बार प्रदेश में मॉनसून करीब एक हफ्ते की देरी से 20 जून को दस्तक देगा. 1940 के बाद ये पहला मौका है जब मॉनसून देर से आता दिख रहा है. लॉकडाउन के कारण प्रदूषण (pollution) में आयी कमी की वजह से इस साल प्रदेश में प्री-मॉनसून एक्टिविटी समय से पहले शुरू हो गयी हैं. यही वजह है कि मई में तीखी गर्मी पड़ने के बजाए आंधी-बारिश हो रही है. तेज़ गर्मी ना पड़ने की मार मॉनसून पर पड़ेगी.
पूरे प्रदेश के साथ भोपाल में भी मौसम दिन भर में कई रंग बदल रहा है. दिन के हर पहर के साथ वो नये तेवर में होता है. खुशनुमा सुबह के बाद तीखी दोपहर और फिर तेज़ हवाओं के साथ सुहानी शाम. एक दिन में हर मौसम का मज़ा प्रदेश के लोग ले रहे हैं. कहीं हल्की बूंदा-बांदी को कहीं ओला-बारिश, मध्य प्रदेश के मौसम का इन दिनों कुछ ऐसा ही मिजाज़ चल रहा है. कोरोना वायरस के अटैक के कारण हुए लॉक डाउन ने मौसम भी बदल दिया है. प्रदूषण ना होने के कारण इस बार प्री मॉनसून एक्टिविटी मई में ही शुरू हो गयी है. इसी का असर है कि प्रदेश में तेज हवाओं के साथ बूंदे भी गिर रही हैं.
मध्य प्रदेश में प्री-मॉनसून गतिविधियां शुरू हो गई है. इसी वजह से मध्य प्रदेश के ज्यादातर जिलों में पिछले 2-3 दिन बारिश हुई. इस बार गर्मी बहुत ज्यादा नहीं पड़ी है इसका असर मानसून पर पड़ने के आसार हैं. मौसम विभाग के मुताबिक जितनी ज्यादा गर्मी पड़ती है, जितनी ज्यादा तपन होती है उतना ही बेहतर मॉनसून रहता है. लेकिन इस बार तीखी गर्मी ना पड़ने के कारण मॉनसून पर असर पड़ सकता है. ऐसा पहली बार है जब मॉनसून 20 जून के बाद मध्यप्रदेश में अपनी आमद देता हुआ दिखाई दे रहा है.1940 के बाद पहली बार है जब मॉनसून आने की तारीख 20 जून के बाद तय हुई है.यानि तय समय से पूरे एक हफ्ते देरी से मध्य प्रदेश में मॉनसून अपनी आमद दर्ज कराएगा.
भोपाल के साथ प्रदेश भर में मौसम बीते 3 दिनों से बार-बार करवट ले रहा है. 10 मई को दोपहर के बाद शाम होते-होते तेज हवाओं के साथ शुरू हुई बूंदाबांदी तेज बारिश में बदल गयी. प्रदेश भर में अब तक 25 सेंटीमीटर बारिश दर्ज हो चुकी है.मौसम वैज्ञानिक अजय शुक्ला का कहना है 12 और 13 मई को बादल छाए रहेंगे.हल्की बूंदाबांदी भी हो सकती है. 13 मई के बाद मौसम पूरी तरह से बदला हुआ दिखाई देगा.14 और 15 मई को 2 दिन तक भोपाल,इंदौर ग्वालियर( वेस्ट एमपी) में बारिश होने के आसार हैं.इन सभी संभागों में बादल छाने के साथ ही बूंदाबांदी या तेज बारिश का भी हो सकती है.
मौसम वैज्ञानिक अजय शुक्ला के मुताबिक राजस्थान और आसपास के इलाकों में आसमान के ऊपरी भाग में ऊपरी हवा का चक्रवात बना हुआ है. वहीं टर्फ लाइन विदर्भ से तमिलनाडु तक बनी हुई है.यह दो मुख्य सिस्टम हैं. जिसकी वजह से लगातार मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है.उधर पाकिस्तान के पास पश्चिमी विक्षोभ मई के महीने में बना हुआ है.पिछले तीन से चार महीनों से अरब सागर में प्रति चक्रवात बना है.पश्चिमी विक्षोभ और प्रति चक्रवात जब एक दूसरे से टकराते हैं तो तेज हवाएं चलती है और दोनों के टकराने से सिस्टम में यह बदलाव आ गए हैं.
मौसम विभाग का कहना है मई के महीने में अधिकतम तापमान में इतनी गिरावट इससे पहले बहुत कम ही देखने को मिली. 2015 के बाद 2020 में मई के महीने में इतना कम तापमान दर्ज किया जा रहा है.तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है. कभी पारा एकदम चढ़ जाता है तो कभी एकदम से लुढ़क जाता है. इसकी मुख्य वजह वेस्टर्न डिस्टरबेंस है. वैसे आम तौर पर मई के महीने में वेस्टर्न डिस्टरबेंस की एक्टिविटीज पहाड़ों में देखी जाती रही है..लेकिन इस बार वेस्टर्न डिस्टरबेंस की एक्टिविटीज मध्य प्रदेश में सक्रिय हैं. यही वजह है कि मौसम में हर दो-तीन दिन में बदलाव हो रहा है. यही बदलाव तापमान भी बदल रहा है.
एमपी के खजुराहो,ग्वालियर, विदिशा सहित कुछ जगहों पर हर साल पारा मई में 45 डिग्री के पार पहुंच जाता था. लेकिन इस बार इन शहरों में तापमान 39 डिग्री से ज़्यादा नहीं पहुंचा है. प्रदेश में कल तक खरगोन, रतलाम, खंडवा, शाजापुर में तापमान 42 डिग्री दर्ज किया गया.उज्जैन में 41 डिग्री,टीकमगढ़ और रायसेन में 40 डिग्री,गुना में 40.2डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया.भोपाल में अधिकतम तापमान 37.7 डिग्री,इंदौर 39.4 डिग्री, जबलपुर 38.0 डिग्री और ग्वालियर में 39.9 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ.

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