जब कुत्ते पारस्परिक प्रजनन करते हैं तो उसके लिए एक-दूसरे से चिपक क्यों जाते हैं?

प्रकृति में विभिन्न जीव जंतुओं के यौन व्यवहार भी जीवों की तरह ही विविधता लिए हुए हैं। चूंकि प्रजनन व वंशवृद्धि के लिए यह अति आवश्यक है अतः लगभग हर जीव को इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। अब क्योंकि जानवर इस प्रक्रिया को मनुष्यों की तरह बापर्दा होकर नहीं करते इसलिए कई मर्तबा तमाशे और जिज्ञासा का विषय बन जाते हैं।

इस प्रश्न का बहुत संक्षेप में उत्तर यह है प्रकृति ने किन्हीं कारणों से श्वान (कुत्ते की) प्रजाति के लिए यह प्रक्रिया कुछ ज्यादा ही लंबी बना दी है।श्वान प्रजाति में परस्पर सहवास की‌ यह प्रक्रिया उनके आसपास विद्यमान परिस्थितियों तथा श्वानों की विभिन्न प्रजातियों के अनुसार 05–45 मिनट तक जारी रह सकती है।

इसके इतना लंबा समय तक चलने का कारण यह होता है कि नर कुत्ते या श्वान के यौनांग पर पीछे की ओर एक विशेष प्रकार की ग्रंथि होती है जिसे कि “बल्बस ग्लैंडिस”(bulbus glandis) कहते हैं। नर श्वान जब संसर्ग करता है तो इस दौरान नर यौनांग मादा के योनि द्वार (vulva) में प्रविष्ट होने के बाद यह ग्रंथि एक बल्ब की तरह फूल जाती है।इस प्रकार नर अंग मादा के यौनांग में पूरी तरह लॉक हो जाता है। इस स्थति को कॉपूलेशन टाई (copulation tie) या कोयटल टाई (coital tie) कहते हैं। यह स्थिति तब तक जारी रहती जब तक यौन क्रिया पूरी तरह संपन्न नहीं हो जाती। इसके लंबा चलने का एक वैज्ञानिक कारण यह भी है कि श्वान प्रजाति के नरों में वीर्यपात (ejaculation) तीन चरणों में संपन्न होता है।

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