सत्यवती ने पराशर ऋषि से संबंध बनाने के लिए उनके सामने रखी थीं ये 3 शर्तें; जान लें

महाभारत के ग्रंथ में कई ऐसे रहस्य हैं जिनके बारे में हम नहीं जानते हैं। आज हम आपको ऋषि पराशर से जुड़े एक किस्से के बारे में बताने जा रहे हैं। एक बार ऋषि पराशर यमुना पार करने के लिए एक नदी पर सवार हुए। उस नाव को मछुआरे की बेटी सत्यवती चला रही थी जो बेहद ही सुंदर और आकर्षक थी। उसे देख ऋषि पराशर उस पर मोहित हो गए।

ऋषि पराशर ने निषाद कन्या सत्यवती से संबंध बनाने की इच्छा जताई। लेकिन उसने इंकार किया और कहा कि ये संबंध अनैतिक होगा, इसलिए मैं अनैतिक संबंध से संतान नहीं पैदा कर सकती हूं। लेकिन पराशर ऋषि फिर भी उस से निवेदन करने लगे।

तब सत्यवती मान गई लेकिन उसने ऋषि के सामने तीन शर्ते रखी। पहली शर्त यह कि उन्हें ऐसा करते हुए कोई नहीं देखे। इसलिए ऋषि ने एक कृत्रिम आवरण बना लिया।

दूसरी शर्त यह थी कि उसकी कौमार्यता किसी भी हालत में भंग नहीं होनी चाहिए। तब ऋषि ने कहा कि बच्चे के जन्म के बात उसकी कौमार्यता पहले जैसी हो जाएगी।

तीसरी शर्त यह थी कि सत्यवती के शरीर से जो मछली जैसी दुर्गंध आती है, वह एक उत्तम सुगंध में परिवर्तित हो जाए। तब पराशर ऋषि ने उसके चारों ओर सुगंध का एक ऐसा वातावरण तैयार कर दिया, जिसे 9 मील दूर से ही महसूस किया जा सकता था।

इसके बाद दोनों ने संबंन्ध बनाए। इसके परिणामस्वरूप एक द्वीप पर सत्यवती ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम कृष्णद्वैपायन रखा। ऋषि पराशर का यही पुत्र आगे चलकर वेद व्यास के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

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