छत्तीसगढ मे घाट से वॉकिंग ट्रैक तक, ऐसे होगा भगवान राम के ननिहाल का कायाकल्प

रायपुर: एक तरफ जहां देश भर में राम मंदिर निर्माण के लिए भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या में भूमि पूजन को लेकर उत्साह है तो वहीं अयोध्या से करीब 800 किलोमीटर दूर छत्तीसगढ़ के चंदखुरी में भी उत्सव का माहौल है. हो भी क्यों ना, क्योंकि इसे भगवान राम का ननिहाल जो कहा जाता है.

अब भगवान राम के इसी ननिहाल चंदखुरी के सौंदर्यीकरण के लिए छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार ने एक बेहद अहम योजना बनाई है. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पास बसे इस गांव के प्राचीन कौशल्या मंदिर के मूल स्वरूप को यथावत रखते हुए, पूरे परिसर के सौंदर्यीकरण की रूपरेखा तैयार कर ली गई है. इस पर करीब 16 करोड़ रुपये की लागत आएगी.

बता दें कि चंदखुरी पहले से ही छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी राम वन गमन पथ विकास परियोजना में शामिल है. जिसके तहत उन सभी जगहों का विकास किया जाना है जहां भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने वनवास के दौरान समय बिताया था या जहां से गुजरे थे.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के अनुसार भगवान राम के ननिहाल चंदखुरी को पर्यटन-तीर्थ के रूप में विकसित किया जाना है, इसलिए वहां स्थित प्राचीन कौशल्या माता मंदिर के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ नागरिक सुविधाओं को विकसित किया जाएगा. तालाब के बीच बने मंदिर तक पहुंचने के लिए नए डिजाइन का हाईटेक पुल तैयार किया जाएगा. ये पुल देखने में ऐसा लगेगा मानो किसी ने हाथों से उसे पानी से ऊपर उठा रखा है.

इसके अलावा तालाब के चारों तरफ घाट और वॉकिंग ट्रैक बनाया जाएगा, जिसपर लोग मंदिर की परिक्रमा भी कर सकेंगे. यहां कई प्रजातियों के छायादार पेड़ लगाए जाएंगे. यहां लाइट एंड साउंड शो की व्यवस्था भी की जाएगी. अभी यहां पार्किंग की उचित व्यवस्था नहीं है, लिहाजा तालाब के सामने की जमीन पर पार्किंग लॉट बनाया जाएगा.

इसके अलावा यहां फूड ज्वाइंट के लिए भी जगह बनाई जाएगी. बता दें कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की चंदखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर में विशेष आस्था है और वो अक्सर यहां अपने परिवार के साथ दर्शन करने आते हैं.

भगवान राम का ननिहाल है ‘चंदखुरी’

पौराणिक कथाओं के मुताबिक चंदखुरी भगवान राम का ननिहाल है. जहां रामलला यानी भगवान राम को भांजा माना जाता है. चंदखुरी को माता कौशल्या का जन्मस्थान भी माना जाता है. इसलिए यहां स्थित एक सुंदर से तालाब के बीचोबीच माता कौशल्या का मंदिर है, जहां मां कौशल्या की गोद में रामलला बैठे हुए हैं.

बताया जाता है कि दुनिया में अपनी तरह का ये इकलौता मंदिर है. चंदखुरी के लोगों को भगवान राम से इतना लगाव है कि आज भी दीवाली पर यहां के लोग पहले माता कौशल्या मंदिर में दीप लगाते हैं और उसके बाद ही घरों में दीवाली पूजन करते हैं.

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