अभी अभीः मोदी सरकार और सुप्रीम कोर्ट का बडा ऐक्शन, एकसाथ कर दिया ये ऐलान

नई दिल्ली। देश के ज्यादातर राज्यों को ऑक्सीजन और जरुरी दवाओं की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. सुप्रीम कोर्ट भी लगातार इस पर नजर बनाए हुए है. सुप्रीम कोर्ट ने आज शनिवार को राज्यों में ऑक्सीजन और जरुरी दवाओं के आवंटन के लिए 12-सदस्यीय राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन कर दिया है.

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह टास्क फोर्स परामर्श और सूचना के लिए केंद्र सरकार के मानव संशाधन विभाग से सलाह और मशविरा के लिए स्वतंत्र होगा. यह फोर्स काम करने के अपने तौर-तरीके और प्रक्रिया तैयार करने के लिए भी स्वतंत्र होगी.

सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित नेशनल टास्क फोर्स के 12 सदस्यों के नामों का भी ऐलान कर दिया गया है.

1. डॉक्टर भबतोष विश्वास, पूर्व कुलपति, पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, कोलकाता.

2. डॉक्टर देवेंद्र सिंह राणा, चेयरपर्सन, बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट, सर गंगा राम अस्पताल, दिल्ली.

3. डॉक्टर देवी प्रसाद शेट्टी, चेयरपर्सन और कार्यकारी निदेशक, नारायण हेल्थकेयर, बेंगलुरु.

4. डॉक्टर गगनदीप कांग, प्रोफेसर, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर, तमिलनाडु.

5. डॉक्टर जेवी पीटर, डायरेक्टर, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर, तमिलनाडु.

6. डॉक्टर नरेश त्रेहन, चेयरपर्सन और प्रबंध निदेशक, मेदांता अस्पताल और हर्ट इंस्टीट्यूट गुरुग्राम.

7. डॉक्टर राहुल पंडित, डायरेक्टर, क्रिटिकल केयर मेडिसिन एंड आईसीयू, फोर्टिस अस्पताल, मुलुंड (मुंबई) और कल्याण (महाराष्ट्र).

8. डॉक्टर सौमित्र रावत, चेयरमैन और हेड, डिपार्टमेंट ऑफ सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और लिवर ट्रांसप्लांट, सर गंगा राम अस्पताल, दिल्ली.

9. डॉक्टर शिव कुमार सरीन, वरिष्ठ प्रोफेसर और हेड ऑफ डिपार्टमेंट ऑफ हेपेटोलॉजी, डायरेक्टर, इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलीरी साइंस (ILBS), दिल्ली.

10. डॉक्टर जरीर एफ उदवाडिया, कंसल्टेंट चेस्ट फिजिशियन, हिंदुजा हॉस्पिटल, ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल और पारसी जनरल हॉस्पिटल, मुंबई.

11. सचिव, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार.

12. नेशनल टास्क फोर्स के संयोजक भी इसके सदस्य होंगे, जो केंद्र सरकार में कैबिनेट सचिव स्तर का अधिकारी होगा. जरुरत पड़ने पर कैबिनेट सचिव सहयोगी की नियुक्ति कर सकते हैं हालांकि वह अतिरिक्त सचिव के पद से नीचे के रैंक के अधिकारी को नामित नहीं कर सकेंगे.

कोविड फैसिलिटी में भर्ती होने के लिए पॉजिटिव रिपोर्ट जरूरी नहीं, सरकार ने बदली नीति

कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना मरीजों को कोविड फैसिलिटी में भर्ती कराने की राष्ट्रीय नीति में बदलाव किया है। अब कोविड हेल्‍थ फैसिलिटी में भर्ती के लिए कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट अनिवार्य नहीं होगी।

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सरकार ने बताया कि मरीजों को ध्‍यान में रखकर यह कदम उठाया गया है। इससे कोरोना से संक्रमित लोगों का तुरंत इलाज शुरू हो सकेगा। अभी तक कोविड फैसिलिटी में भर्ती के लिए कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट जरूरी होती थी।

केंद्र सरकार ने कोविड मरीजों को देख रहे सभी निजी अस्‍पतालों सहित राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस बारे में निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों में कहा गया है कि जिन मामलों में संदेह है, उन्‍हें CCC, DCHC या DHC के सस्‍पेक्‍ट वॉर्ड में भर्ती किया जाए। किसी भी मरीज को सेवाएं देने से मना नहीं किया जाएगा। इन सेवाओं में ऑक्सिजन या जरूरी दवाओं को देना शामिल है। फिर भले मरीज दूसरे शहर का ही क्‍यों न हो।

सरकार ने साफ कहा है कि किसी के पास मान्‍य पहचान पत्र न होने के आधार पर उसे भर्ती करने से मना नहीं किया जाए। अस्‍पताल में मरीज को जरूरत के आधार पर भर्ती किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जिन लोगों को अस्‍पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है, वे बेवजह बेड न लें।

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रधान सचिवों से तीन दिन के भीतर इन निर्देशों को लेकर आदेश और सर्कुलर जारी करने के लिए कहा है।