भारत के सीरम इंस्टिट्यूट में लगी आग तो पूरी दुनिया में मच गया हड़कंप, मची खलबली

पुणे। महाराष्ट्र के पुणे स्थित वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के मंजरी प्लांट में गुरुवार को आग लग गई। हादसे में 5 कर्मचारियों की जान चली गई। आग लगने से इंस्टिट्यूट को हुए कुल नुकसान के बारे में अभी जानकारी नहीं है। हालांकि, राहत की बात है कि इस हादसे में कोरोना वायरस की वैक्सीन पर कोई खतरा नहीं है। दरअसल, आग इंस्टिट्यूट के निर्माणाधीन और नए प्लांट में लगी है। वहां से

कोरोना वैक्सीन बनाने वाला प्लांट काफी दूर है।

जानकारी के अनुसार, सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के मंजरी प्लांट में यह हादसा हुआ, जो संस्थान के गेट नंबर-1 पर स्थित है। जिस प्लांट में कोरोना की वैक्सीन बन रही है, वह गेट नंबर- 3, 4 और 5 पर मौजूद है। यहीं स्थित प्लांट में कोरोना वैक्सीन का निर्माण और भंडारण किया जाता है। बताया गया कि यह तीनों गेट हादसे वाली जगह से एकदम उल्टी दिशा में हैं। आग पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है।

संस्थान के अधिकारियों ने बताया कि हादसे में कोरोना वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है लेकिन टीबी की बीमारी में काम आने वाली बीसीजी वैक्सीन को नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों ने बताया कि हालांकि, मंजरी प्लांट में बीसीजी का ज्यादा स्टॉक नहीं था, इसकी वजह से बहुत ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है।

दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी
सीरम इंस्टिट्यूट दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी है। यहां बनने वाली वैक्सीन के सबसे ज्यादा डोज दुनिया भर में बेचे जाते हैं। जानकारी के मुताबिक, 1.5 बिलियन से भी ज्यादा वैक्सीन के डोज दुनिया भर में सीरम इंस्टिट्यूट से बिकने के लिए जाते हैं। इनमें पोलियो, आर-हिपेटाइटिस बी, टिटनस, डिप्थीरिया, टीबी आदि बीमारियों के वैक्सीन शामिल हैं।

1966 में हुई स्थापना
सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की स्थापना साल 1966 में साइरस पूनावाला ने की थी। फिलहाल, यह संस्थान भारत का नंबर एक बायो-टेक्नॉलजी कंपनी है। बताया जाता है कि दुनिया की तकरीबन 65 प्रतिशत बच्चों की आबादी को सीरम इंस्टिट्यूट में बनी कम से कम एक वैक्सीन लगाई जा चुकी है। दुनिया के कई देशों के राष्ट्रीय इम्युनाइजेशन प्रोग्राम्स में सीरम इंस्टिट्यूट के वैक्सीन का इस्तेमाल किया जाता है।

कोरोना वैक्सीन का निर्माण
भारत में कोरोना वायरस की दो वैक्सीन को मंजूरी दी गई है। एक भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और दूसरी सीरम इंस्टिट्यूट की कोविशील्ड है जो ऑक्सफोर्ड-एक्स्ट्राजेनेका की वैक्सीन का ही भारतीय संस्करण है। दोनों वैक्सीन ने पहले चरण के वैक्सिनेशन के लिए टीका डिलिवर कर दिया है। देश के कई हिस्सों में वैक्सिनेशन शुरू भी हो गया है। टीका लगाए जाने की प्रक्रिया जारी है।

सीरम इंस्टिट्यूट के CEO अदार पूनावाला के मुताबिक, भारत सरकार को कोविशील्ड की पहली 10 करोड़ डोज 200 रुपये प्रति डोज के हिसाब से दी गई है। मार्केट में यह एक हजार रुपये प्रति डोज के हिसाब से उपलब्ध है। पूनावाला ने दावा किया है कि उनकी कंपनी हर महीने पांच से छह करोड़ वैक्सीन की डोज तैयार कर रही है।

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