एक प्यार ऐसा भी: मायके गई रूठी पत्नी को मानने के लिए लिखा 8 किलो का प्रेम पत्र -देखे VIDEO

लिखे जो खत तुझे वो तेरी याद में हजारो रंग के नजारे बन गए’, ‘यह मेरा प्रेम पत्र पढ़कर कि तुम नाराज ना होना’. हिंदी फिल्मों के कुछ ऐसे तराने जो प्रेमी युगलों के जीवन में 1950 के दशक से लेकर आज तक प्रेम की अभिव्यक्ति के लिए लिखे जाने वाले लव लेटर्स की भूमिका साबित करने के लिए काफी हैं. बदलते दौर के साथ प्रेम की अभिव्यक्ति का तरीका ही बदल गया. प्रेमपत्र का स्थान सोशल मीडिया पर प्रेमीजोड़े की बीच होने वाली चैटिंग ने ले लिया. मगर मेरठ के रहने वाले जीवन लाल बिष्ट द्वारा अपनी ही पत्नी को लिखा गया प्रेम पत्र आज भी दुनिया के बेहतरीन प्रेम पत्रों में शामिल है.

हर पेज में 3200 शब्द
भला आप सोच सकते हैं कि कोई लव लेटर 8 किलो का हो सकता है. कम से कम वॉट्सऐप और फेसबुक के इस दौर में तो ऐसा होना नामुमकिन है. हम आपको दिखाते हैं 20 साल पुरानी प्रेम कहानी, जब एक शख्स ने दो महीने में 8 किलो का प्रेम पत्र लिखकर तैयार किया. इस वजनदार लव लेटर को अपनी पत्नी तक पहुंचाने में 700 रुपये का खर्च आया था. मेरठ के जीवन सिंह बिष्ट की ये दास्तां अनूठी है. मोहब्बत की जो उन्होंने इबारत लिखी उसकी मिसाल आसानी से नहीं मिलेगी. इस लव लेटर के हर पेज में 3200 शब्द लिखे गए थे. आइए जानते हैं लव लेटर का यह अनूठा किस्सा.

जब न वॉट्सऐप था, डिजिटल टेलिग्राम भी नहीं और फेसबुक का भी कोई अता-पता नहीं था. उस दौर में इश्क के इजहार के लिए डिजिटल इमोजी नहीं बल्कि खतों का सहारा हुआ करता था. आज भी कई लोगों ने उस दौर की यादों को बहुत सलीके से रखा है. उस दौर से जुड़े ढेरों किस्सों में मेरठ के एक दीवाने का किस्सा बहुत खास है.

मेरठ जनपद में शताब्दी नगर सेक्टर 1 के रहने वाले जीवन सिंह बिष्ट आयकर विभाग से नोटिस सर्वर की पोस्ट से रिटायर हैं. जीवन सिंह बताते हैं कि उनकी पत्नी कमला मूल रूप से अल्मोड़ा की निवासी थीं. शादी के बाद अकसर उनकी पत्नी मायके में ही रहती थीं. ऐसे में पत्नी से अगाध प्रेम करने वाले जीवन को अकसर उनकी याद सताती थी. उस जमाने में मोबाइल फोन तो दूर की बात टेलीफोन कनेक्शन भी कुछ ही घरों में हुआ करते थे.

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