राजस्थान की सत्ता में कौन! आज होगा फैसला, माया पर टिंकी निगाहें

जयपुर। राजस्थान में एक महीने से ज्यादा समय से चल रही राजनीतिक उठापटक के बीच शुक्रवार का दिन काफी अहम साबित होने वाला है। राजस्थान कांग्रेस में सचिन पायलट गुट की बगावत और फिर सचिन गुट के कांग्रेस में मिलन के बाद आज विधानसभा का अहम सत्र शुरू होगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सत्र के दौरान विश्वास प्रस्ताव चलाने का एलान किया है जबकि भाजपा ने अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए मोर्चेबंदी पूरी कर ली है। इस बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने बड़ी चाल चलते हुए अपने सभी 6 विधायकों को व्हिप जारी कर कांग्रेस के खिलाफ वोट देने का निर्देश दिया है।

विधायकों को एकजुटता का संदेश
विधानसभा सत्र से पूर्व कांग्रेस विधायकों की बैठक में गुरुवार को पार्टी की रणनीति तैयार की गई। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास पर हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में सचिन पायलट और उनके समर्थक 18 विधायकों ने भी हिस्सा लिया। बैठक में विधायकों को एकजुटता का संदेश दिया गया और गहलोत ने बीती बातों को भुलाने और अपनों को अपना मानने पर जोर दिया।

बैठक में अशोक गहलोत आत्मविश्वास से भरे दिखे और उन्होंने कहा कि हम इन 19 विधायकों के बिना भी बहुमत साबित कर देते, लेकिन वह खुशी नहीं मिलती। उन्होंने खुद विश्वास प्रस्ताव लाने की घोषणा करते हुए कहा कि जो विधायक नाराज हैं, उनकी नाराजगी दूर की जाएगी।

भाजपा ने भी की मोर्चेबंदी
उधर भाजपा ने भी अपने विधायकों की बैठक कर कांग्रेस के खिलाफ रणनीति तैयार की। भाजपा की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी हिस्सा लिया। काफी दिनों से राजस्थान की सियासत में लुकाछिपी का खेल खेल रहीं वसुंधरा गुरुवार को काफी सक्रिय दिखीं। सचिन पायलट गुट की बगावत के बाद वे काफी दिनों तक चुप्पी साधे रही थीं मगर इस बैठक के दौरान वे हमलावर मुद्रा में दिखीं।

अविश्वास प्रस्ताव लाने का एलान
भाजपा विधायकों की बैठक में वसुंधरा ने कांग्रेस सरकार पर जनता के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्तारूढ़ होने के बाद जनता के लिए कोई काम नहीं किया। बैठक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का एलान किया।

दोनों नेताओं ने कहा कि पिछले एक महीने से राजस्थान की सरकार बाड़े में बंद है और जनता का कोई काम नहीं किया जा रहा है। उन्होंने प्रदेश में केंद्र सरकार की योजनाओं की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया। दोनों नेताओं ने कहा कि ऐसी सरकार को सत्ता में रहने का हक नहीं है।

फोन टेपिंग के मुद्दे पर चर्चा नहीं
विधानसभा के मौजूदा सत्र के प्रश्न काल के लिए चुने गए सवालों में से फोन टेपिंग से जुड़े सवाल को बाहर कर दिया गया है जबकि भाजपा की ओर से इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने का एलान किया गया है। विधायकों की तरफ से भेजी गई सूची के आधार पर सबसे बड़ा मुद्दा कोरोना का ही होगा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा के मुताबिक विधायकों की तरफ से कोरोना संकट से जुड़े 26 सवाल दिए गए हैं।

खत्म हो गईं‌ गहलोत की दिक्कतें
वैसे अविश्वास प्रस्ताव को लेकर अशोक गहलोत का संकट पूरी तरह खत्म हो चुका है। सचिन पायलट गुट की बगावत के बाद भी गहलोत पूरी तरह विश्वास से भरे दिख रहे थे और अब सचिन पायलट गुट की वापसी के बाद उनकी दिक्कतों का पूरी तरह अंत हो गया है। वैसे बसपा मुखिया मायावती ने बड़ा कदम उठाते हुए अपने छह विधायकों को कांग्रेस सरकार के खिलाफ वोट देने का निर्देश दिया है। इस बाबत पार्टी की ओर से विधायकों को व्हिप भी जारी किया गया है।

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