भारत की कंपनी बोलीः एक बार वैक्सीन बने तो सही, इतना प्रोडक्शन करेंगे कि…

नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी श्सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडियाश् का नाम इन दिनों बहुत चर्चा में है. इस भारतीय कंपनी ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्रा जेनेका जैसी बड़ी फार्मास्यूटिक्ल्स कंपनियों के लिए कोरोना वैक्सीन का उत्पादन करने के लिए कमर कस ली है. इतना ही नहीं, कंपनी अलग से वैक्सीन पर रिसर्च भी कर रही है।

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने में सफल होती है तो पुणे की यही कंपनी बड़े पैमाने पर उसका उत्पादन करेगी. कंपनी ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ इसके उत्पादन के लिए साझेदारी की है.

सीरम इंस्टिट्यूट के हेड ऑफ रिसर्च उमेश शालीग्राम ने बताया कि केंद्र सरकार ने हमारे हर काम पर पैनी नजर बना रखी है.स्टाफ दिन रात पूरी लगन के साथ काम कर रहा है. कंपनी को सरकार की तरफ से रोजाना व्हाट्सएप पर मैसेज भेजे जाते हैं, जिसमें सरकार हर दिन का अपडेट लेती है और काम में आने वाली समस्याएं पूछती है.

उमेश शालीग्राम ने बताया कि ये मैसेज प्रधानमंत्री मोदी के टॉप साइंटिस्ट एडवाइजर के. विजयराघवन की तरफ से भेजे जाते हैं. शालीग्राम ने कहा, ‘उनके साथ सभी तरह की दिक्कतें साझा की जा रही हैं. किसी भी काम के लिए मंजूरी मिलने में बिल्कुल देरी नहीं होती है. जिस काम की मंजूरी मिलने में 4-6 महीने का वक्त लग जाता था उन पर अब सिर्फ दो दिन में अप्रूवल मिल जाता है.’

सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदर पूनावाला ने बताया कि दुनिया की 60-70 प्रतिशत वैक्सीन का उत्पादन यहीं होता है. ऐसे में कोरोना वायरस की वैक्सीन का उत्पाद करने में कंपनी बड़ा योगदान दे सकती है.

उन्होंने बताया कि करीब सीरम इंस्टिट्यूट हर साल 1.5 बिलियन वैक्सीन के डोज हर साल बनाती है. करीब डेढ़ सौ एकड़ में फैले इस इंस्टिट्यूट में लॉकडाउन के दौरान भी काफी चहल-पहल दिख रही है. शालीग्राम और उनकी टीम इस बीच काफी मेहनत कर रही है.

लॉकडाउन के बावजूद यहां रोजाना दर्जनों बसें भरकर सैकड़ों कर्मचारियों को ग्राउंड पर ले जाती हैं. पूनावाला का कहना है कि वैक्सीन के साथ-साथ कोरोना से लड़ने के लिए दवाई की भी जरूरत है. कई बार ऐसा देखा जाता है कि वैक्सीन किसी मरीज पर पूरा काम नहीं करती.

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