बुरी खबरः देश में ओर बढने वाला है कोरोना का कहर!, दो-तिहाई जिलों में…

नई दिल्ली। देश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अब इस महामारी ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है। प्रवासी मजदूरों के लौटने से स्थिति और विकराल होती जा रही है। गृह मंत्रालय के मुताबिक 75 लाख प्रवासी मजदूर अपने घर पहुंच चुके हैं। इनमें से अधिकांश उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा के हैं। प्रवासियों के आने का कारण इन राज्यों में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं लेकिन इन राज्यों में टेस्टिंग की सुविधा बहुत कम है। देश के दो-तिहाई जिलों में कोरोना टेस्टिंग के लिए एक भी लैब नहीं हैं।
हालांकि कोरोना के मामलों के बढ़ने के साथ ही देश में टेस्टिंग क्षमता भी लगातार बढ़ रही है। अभी रोजाना एक लाख से अधिक नमूनों की जांच की जा रही है। लेकिन देश में टेस्टिंग लैबोरेटीज का जिस तरह फैलाव है उससे टेस्टिंग स्ट्रैटजी में खामियां और असंतुलन साफ दिखता है। इससे नमूनों की जांच में देरी हो रही है। इस तरह कोविड-19 के संदिग्ध मरीजों की पुष्टि होने में देरी से कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं। जब तक रिपोर्ट आती है तब तक संक्रमित व्यक्ति इसे बहुत लोगों को बांट चुका होता है।
देश में कोविड-19 की टेस्टिंग के लिए इस समय भारतीय आयुर्विज्ञान शोध परिषद (आईसीएमआर) से मान्यता प्राप्त 607 लैब हैं। इनमें से 427 सरकारी लैब हैं जबकि केवल 180 निजी लैब हैं। देश के 736 जिलों में से करीब दो-तिहाई यानी 486 जिलों में टेस्टिंग फैसिलिटी नहीं है। देश के विभिन्न राज्यों में नए टेस्टिंग सेंटर के लिए आईसीएमआर के पास 50 आवेदन लंबित हैं। लेकिन कोविड-19 टेस्टिंग लैब का दर्जा पाने के लिए वे शर्तों को पूरा नहीं करते हैं। इसके लिए इन लैब के पास बायो सेफ्टी कैबिनेट के साथ कैलिब्रेटेड और फुली फंक्शनल टेस्टिंग मशीन, एक कोल्ड सेंट्रीफ्यूज, आरएनए एक्ट्रैक्शन किट, वेस्ट को स्टरलाइज करने के लिए ऑटोक्लेव, अनुभवी कर्मचारी और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट पॉलिसी होनी चाहिए। इसमें से अधिकांश सेंटरों के पास अनुभवी कर्मचारियों की कमी है। आईसीएमआर के दिशानिर्देशों के मुताबिक हर टेस्टिंग सेंटर में कम से कम एक मेडिकल माइक्रोबायलॉजिस्ट और मॉलीक्यूलर वायरोलॉजी में अनुभव रखने वाले 4 से 6 टैक्नीशियन होने चाहिए।
कर्मचारियों की कमी के अलावा ये टेस्टिंग सेंटर असंतुलित ढंग से फैले हैं। मई में अब तक जिन 281 नई लैब को मंजूरी दी गई, उनमें से 69 फीसदी यानी 194 कोरोना के सर्वाधिक मामलों वाले सात राज्यों कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, गुजरात, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना में हैं। इंडियन एक्सप्रेस में छपी इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में आधी से अधिक यानी 318 लैब छह राज्यों में है। इनमें से दिल्ली में 32, गुजरात में 37, कर्नाटक में 57, महाराष्ट्र में 72, तमिलनाडु में 68 और आंध्र प्रदेश में 52 लैब हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में 27, बिहार में 16 और ओडिशा में 17 लैब ही हैं। बसों और ट्रेनों के जरिए बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर इन राज्यों में अपने घर लौटे हैं। गृह मंत्रालय के मुताबिक लॉकडाउन में 75 लाख प्रवासी अपने घर पहुंच चुके हैं। अगले दस दिन में 36 लाख और प्रवासियों के घर लौटने की संभावना है। बड़ी संख्या में प्रवासियों के इसके कारण इन राज्यों में कोरोना के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन उनकी जांच के लिए इन राज्यों में पर्याप्त संख्या में लैब नहीं हैं।

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