आसान नहीं होगा रेल का सफर, 28 दिन तक रहना होगा क्वारंटाईन!, जरूर पढ लें यह खबर

नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की केंद्र सरकार की मजबूरी और कोरोना के बढ़ते मरीजों से निपटने की राज्य सरकारों की चुनौती ने आम लोगों को दुविधाजनक स्थिति में ला खड़ा किया है। अलग-अलग राज्य थर्मल स्क्रीनिंग के बाद यात्रियों के घर जाने की छूट से लेकर होम क्वारंटाइन और इंस्टीट्यूशनल क्वारंटाइन जैसे अलग-अलग मापदंड अपना रहे हैं। नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप पुरी ने आरोग्य सेतु एप का इस्तेमाल करने की सलाह देते हुए साफ कर दिया स्वस्थ्य लोगों को आने-जाने से रोकने का कोई तुक नहीं है, लेकिन कई राज्य सरकारें इसे मानने को तैयार नहीं हैं।
केंद्र सरकार ने जब सोमवार से हवाई और एक जून से रेल सेवाओं को सीमित स्तर पर बहाल करने की घोषणा की तो, तो लोगों अपनों से मिलने और काम-काज के लिए एक-से-दूसरी जगह जाने की उम्मीद जगी थी। रेलवे और विमानन कंपनियों ने अपनी बुकिंग भी शुरू कर दी और लोगों ने टिकट भी कटा लिये। कोरोना का प्रसार रोकने के लिए केंद्र ने एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों पर थर्मल स्क्रीनिंग को अनिवार्य बनाते हुए केवल उन्हीं यात्रियों को जाने देने की गाइडलाइन्स जारी की, जिन्हें बुखार या कोरोना का कोई अन्य लक्षण नहीं हो। इसमें आरोग्य सेतु एप के इस्तेमाल की सलाह भी शामिल है। केंद्र सरकार की कोशिश भले ही दो महीने से बंद अर्थव्यवस्था के पहिये को फिर से घुमाने और जनजीवन को सामान्य बनाने की हो। लेकिन कोरोना के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जूझ रही राज्य सरकारें बिना किसी रोक-टोक के दूसरे राज्यों से लोगों को आने देने के लिए तैयार नहीं है। लेकिन उससे भी बडी समस्या यह है कि इसमें राज्यों में एकरूपता नहीं है। देश की राजधानी दिल्ली ने बाहर से आने वालों के लिए खुद न तो स्क्रीनिंग की व्यवस्था की है और न ही उन्हें क्वारंटाइन में रखने की कोई नीति बनाई है। रेलवे और एयरपोर्ट की ओर से की जा रही स्क्रीनिंग पर भरोसा करते हुए दिल्ली में यात्रियों को कहीं भी आने-जाने की पूरी छूट है।
प्रवासी मजदूरों के लिए 14 दिन के क्वारंटाइन को अनिवार्य बनाने वाले बिहार ने भी रेल या हवाई यात्रियों पर कोई रोक नहीं लगाने का फैसला किया है। जबकि उत्तरप्रदेश ने साफ कर दिया कि प्रवासी मजदूर हो, या फिर हवाई जहाज व ट्रेनों से आने वाले यात्री 14 दिन तक उन्हें अनिवार्य रूप से घर पर ही क्वारेंटाइन में ही रहना होगा। वहीं झारखंड ने अभी तक इनके बारे में कोई नीति तय नहीं की है। दिल्ली, बिहार और उत्तरप्रदेश के विपरीत पंजाब और झारखंड ने बाहर से आने वाले सभी यात्रियों के लिए इंस्टीट्यूशनल क्वारेंटाइन अनिवार्य बना दिया है। कर्नाटक में भी यही प्रावधान है। ध्यान देने की बात है कि कर्नाटक ने 13 मई को राजधानी एक्सप्रेस से आने वाले 50 यात्रियों को इसीलिए वापस दिल्ली लौटा दिया था, क्योंकि इन यात्रियों ने इंस्टीट्यूशनल क्वारेंटाइन में जाने से मना कर दिया था और इसके बजाय होम क्वारेंटाइन में रहने की जिद कर रहे थे।
जाहिर है कहने को सोमवार से हवाई सेवाएं और एक जून से ट्रेन सेवाएं शुरू हो रही हैं, लेकिन यह सिर्फ उन लोगों के लिए ही होंगी, जो जाने के बाद 14 दिन तक क्वारेंटाइन में रहने को तैयार हों। यदि पंजाब से कोई व्यक्ति उत्तरप्रदेश आता है और वापस पंजाब जाता है, तो उसे उत्तरप्रदेश में 14 दिन होम क्वारेंटाइन और 14 दिन पंजाब में इंस्टीट्यूशनल क्वारेंटाइन में रहना होगा। दो-चार दिन की यात्रा के लिए 28 दिन के क्वारेंटाइन की मजबूरी का कोई तुक नहीं है। रेलवे और हवाई यात्रियों को लेकर फैली दुविधा की वजह कोरोना की लड़ाई को राज्यों के भरोसे छोड़ने के केंद्र का फैसला है। लॉकडाउन-तीन तक केंद्र की ओर बताया जाता था कि रेड, आरेंज और ग्रीन जोन कौन-कौन से होंगे और उनमें किन-किन गतिविधियों की इजाजत होगी। राज्यों को इनमें कोई भी ढील देने की इजाजत नहीं थी। लेकिन लॉकडाउन-चार की गाइडलाइंस में केंद्र में रेड, आरेंज और ग्रीन जोन तय करने की जिम्मेदारी राज्यों पर छोड़ दी। यहीं नहीं, राज्यों को कंटेनमेंट एरिया और बफर जोन के बाद आर्थिक गतिविधियां तय करने की भी छूट दे दी गई।

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