अभी अभीः दुनियाभर में आने वाली है तबाही? पिछले 24 घंटों में…

नई दिल्ली. दुनियाभर में लगातार आ रहे भूकंपों से वैज्ञानिक भी हैरान है। बीते 24 घंटों में पूरी दुनिया में 60 से ज्यादा भूकंप आये है। वहीं भारत की बात करें तो यहां भी पिछले कुछ दिनों में 9 बार भूकंप के झटके महसूस किये गये है। भारत में बीते 2 महीनों में लगातार 9 से ज्यादा बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. 14 जून को गुजरात में भी 5.5 तीव्रता वाला भूकंप आया, जबकि दिल्ली-NCR के इलाके में भी 8 बार भूकंप आ चुके हैं. हालांकि बता दें कि दुनिया भर में भूकंप आ रहे हैं और 15 जून की सुबह ही तुर्की में 5.7 तीव्रता का एक भूकंप दर्ज किया गया है. भूकंप का हिसाब-किताब रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की माने तो सिर्फ 14 जून को दुनिया भर में 50 से ज्यादा भूकंप आए हैं.

earthquake.usgs.gov पर नज़र डालें तो पता चलता है कि 14 जून को दुनिया में 50 जगह भूकंप आया, जिनकी तीव्रता 5.4 से लेकर 2.5 तक मापी गयी. जिन देशों में भूकंप आया उनमें इंडोनेशिया, हवाई, पुर्तो रिको, म्यांमार, जमैका, अलास्का, तुर्की, भारत, जापान, ईरान, फिलीपींस प्रमुख है. हालांकि इनमें से कई देशों में एक से ज्यादा बार झटके आए हैं. इसके लावा इनमें से ज्यादातर देश ज्वालामुखी क्षेत्र में पड़ते हैं जिसके चलते ये भूकंप के भी रेड जोन में माने जाते हैं. एक अन्य वेबसाट ds.iris.edu के मुताबिक भी बीते 2 महीनों से दुनिया के रेड और ऑरेंज जोन में हलचल बढ़ी हैं और इसका नतीजा लगातार भूकंप के तौर पर सामने आ रहा है. इसके मुताबिक दुनिया के करीब 23 देशों में 14 जून को भूकंप के झटके दर्ज किए गए और 13 जून को भी करीब 20 देशों में भूकंप के झटके दर्ज किए गए थे.

कच्छ में 10 सेकंड धरती हिली
गुजरात के कच्छ में 14 जून को आए भूकंप में 10 सेकंड तक झटके महसूस किए गए. राजकोट में तीन आफ्टर शॉक भी महसूस किए गए. सौराष्ट्र में 4.8 तीव्रता के साथ करीब 7 सेकंड तक झटके आए. अहमदाबाद में 3.4 तीव्रता के झटके करीब 5 सेकंड तक महसूस किए गए. जामनगर, सुरेंद्रनगर और जूनागढ़ में भी झटके महसूस किए गए. कई शहरों में लोग अपने घरों से बाहर निकल आए. कच्छ, मोरबी, राजकोट में कई घरों में दरारे आई हैं. भूकंप आने के बाद मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने राजकोट, कच्छ और पाटन जिले के कलेक्टरों से फोन पर हालात की जानकारी ली है.

क्यों आता है भूकंप?
बता दें कि पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं जो लगातार घूम रही हैं. जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है. बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं. जब ज्यादा प्रेशर बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं. नीचे की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है. इसी से भूकंप पैदा होता है.

अर्थक्वेक ट्रैक एजेंसी के मुताबिक हिमालयन बेल्ट की फॉल्ट लाइन के कारण एशियाई इलाके में ज्यादा भूकंप आते हैं. प्लेट्स जहां-जहां जुड़ी होती हैं, वहां-वहां टकराव ज्यादा होता है और उन्हीं इलाकों में भूकंप ज्यादा आता भी है. धरती पर जो भी बड़े-बड़े पहाड़ दिख रहे हैं, वो सब के सब प्लेट्स के टकराने से ही बने हैं. ये प्लेट्स कभी आमने-सामने टकराती हैं तो कभी ऊपर नीचे टकराती हैं तो कभी आड़े-तिरछे भी टकरा जाती हैं. और जब-जब ये टकराती हैं, भूकंप आ जाता है. ये भूकंप आता है तो धरती हिलती है.

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