अभी अभीः अमेरिका का बडा ऐलानः चीन को बैन करके भारत में शिफ्ट करो सारे उद्योग

चीन को लेकर अमेरिका का रवैया और तल्ख होता जा रहा है. अब अमेरिका के एक कांग्रेसमैन ने कहा है कि चीन में मौजूद उद्योगों को भारत शिफ्ट किया जाना चाहिए. ताकि दुनिया में चीन के अलावा भी एक विकल्प तैयार हो सके. इंडिया टुडे के साथ विशेष बातचीत में ये बातें अमेरिकी कांग्रेसमैन और विदेश मंत्रालय की उपसमिति के सदस्य टेड योहो ने कही.

टेड योहो ने कहा कि अमेरिका की पहली नीति यही है कि अपने जैसी मानसिकता वाले देशों को साथ रखो. अमेरिका एक प्लान बना रहा है कि कैसे चीन से अपने उद्योग निकालकर भारत में स्थापित किए जाएं. साथ ही जो उद्योग अमेरिका लौटना चाहते हैं वो वापस आ जाएं.

टेड ने बताया कि इसका ताजा उदाहरण है कि जब पूरी दुनिया को सबसे ज्यादा पीपीई (PPE) की जरूरत थी तब चीन ने अपने हाथ खड़े कर दिए थे. इससे पूरी दुनिया की सप्लाई रुक गई. इसके बाद हमने आपके राजदूतों से बात की, उन्हें बताया कि क्यों न चीन से इंडस्ट्री को शिफ्ट करके भारत ले आया जाए.

टेड ने कहा कि हम चाहते हैं कि भारत जैसे अन्य सहयोगी देशों में भी हम अपना उद्योग स्थापित करें. इससे चीन का वर्चस्व खत्म होगा और हमें कई विकल्प मिल जाएंगे. भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया कार्यक्रम चला रखा है. ऐसी हालत में अगर इंडस्ट्री चीन से उठकर भारत आती है तो उसे बड़ा निवेश मिलेगा.

कांग्रेसमैन टेड ने कहा कि इस कदम से चीन के ऊपर आर्थिक दबाव बनेगा. साथ ही बीजिंग सप्लाई चेन से अलग हो जाएगा. तब हम अपनी इंड्स्ट्रीज को खास तौर से लाइवस्टॉक और एपीआई भारत और उस जैसे सहयोगी देशों में स्थानांतरित करेंगे. इससे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और कम्युनिस्ट पार्टी के ऊपर आर्थिक दबाव बनेगा.

टेड ने कहा कि दुनिया को चीन से संबंध तोड़ लेना चाहिए. क्योंकि चीन अपने लोगों की भलाई के लिए जो बातें कहता है वह न देश के अंदर लागू करता है, न ही बाकी देशों के साथ. अब चीन हमारा नॉर्मल स्टैंडर्ड नहीं बना सकता. मैं ये नहीं कहता कि चीन हमारे या भारत की तरह हो जाए, पर कम से कम सम्मान, मानवाधिकार और इंसानियत की आदत तो डाले.

टेड ने आगे बताया कि अमेरिका नहीं चाहता कि सिर्फ चीन को ही दुनिया की फैक्ट्री कहा जाए. उसे भी विकसित देशों में शामिल किया जाए. उसे विकसशील देशों वाली सुविधाएं न मिलें. न ही उसे वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (WTO) से किसी प्रकार की मदद मिले.

टेड ने कहा कि चीन का सिद्धांत है कि आसमान में दो सूरज नहीं हो सकते. किसी एक को हटना होगा. वो खुद को सुपरपावर के रूप में देखना चाहते हैं ताकि बाकी दुनिया पर राज कर सकें. उनका मकसद दुनिया को आर्थिक और सैन्य शक्ति के बल पर अपनी उंगलियों पर नचाते रहो.

टेड ने सवाल पूछा कि क्यों चीन पांच युद्धपोत बना रहा है. क्यों उसने अपना रक्षा बजट 6.9 फीसदी बढ़ाया. जबकि चीन WTO के विकासशील देशों के टैग के पीछे छिपकर दुनिया को बेवकूफ बना रहा है. अब हमारे पास ऐसा कानून है कि हम चीन को वहां से हटा सकते हैं.

टेड ने कहा कि ये बात एकदम सही है कि चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी है. लेकिन यह अब भी विकासशील देशों के टैग के पीछे छिपकर फायदे ले रहा है. अब दुनिया को चाहिए कि वे चीन का समर्थन बंद कर दें.

अमेरिका चीन पर बेहद सख्त प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है. ताकि उसे ताइवान, हॉन्ग कॉन्ग, साउथ चाइना सी और विश्व स्वास्थ्य संगठन को गलत रिपोर्ट देने की सजा मिल सके. हमारी तैयारी है कि चीन के बड़े बैंकों पर प्रतिबंध लगाने वाले हैं.

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