अखबार ने छापे कोरोना से मरने वालोें के नाम तो भर गया सारा पेज, रो पडा पूरा देश

नई दिल्ली। ये ऐसी क्षति है जिसका कोई हिसाब नहीं हो सकता, जिसकी कोई गिनती नहीं हो सकती। अमरीकी अख़बार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने 24 मई के अपने पहले पहले पन्ने पर यही शीर्षक लगाया है। अमरीका में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या एक लाख के करीब हो गई है। मरने वालों को श्रद्धांजलि देते हुए और उनके लिए शोक व्यक्त करते हुए अख़बार ने अपना पूरा फ्रंट पेज उनके नाम समर्पित कर दिया।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने अब तक कोविड-19 की वजह से जान गंवाने वाले सभी लोगों ने नाम प्रकाशित किए हैं. अख़बार ने लिखा है, ष्वो सिर्फ लिस्ट के कुछ नाम नहीं थे, वो यहां हमारे साथ थे। न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने ट्विटर हैंडल पर भी यह फ्रंट पेज पोस्ट किया है. सोशल मीडिया पर न्यूयॉर्क टाइम्स के इस कदम की चर्चा और तारीफ हो रही है।

एक ट्विटर यूजर ने लिखा हैः ये मृतकों के परिवारों के प्रति सम्मान जाहिर करने का बहुत अच्छा तरीका है. जाने वालों को भूला नहीं जाएगा. ये नाम प्रकाशित करने के लिए साहस चाहिए।

एक व्यक्ति ने लिखा हैः इसके लिए शुक्रिया. मैं उम्मीद करता हूं लोग इस दुख से उबर पाएं. ये मौतें सिर्फ संख्या नहीं हैंरू ये वो लोग हैं जिनका परिवार था, जिनके दोस्त थे. उन सबकी जिंदगियां महामारी की वजह से छोटी हो गईं.

टाइम्स इनसाइडर में लिखे एक लेख में न्यूयॉर्क टाइम्स के ग्राफिक्स एडिटर सिमॉन लैंडन ने कहा कि ये फैसला कोरोना जैसी भयावह त्रासदी और लोगों की पीड़ा को व्यक्तिगत स्तर पर महसूस किए जाने के लिए किया गया.

उन्होंने कहा, ष्हमारे पाठक और हम सब लगातार महामारी की रिपोर्टिंग को आंकड़ों के रूप में देखने लगे हैं. लेकिन ये मजह आंकड़े नहीं हैं. ये लोग हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स के प्रिंट एडिटर जॉश क्रचमर ने भी इसे अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया है. जॉन्स हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी के आंकड़ों के अनुसार अमरीका के अब तक कोविड-19 संक्रमण के कुल 16,22,670 मामले हो चुके हैं और मरने वालों की संख्या 97,087 हो गई है.

अमरीका में कोरोना संक्रमण मामलों और इससे होने वाली मौतों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार ये दावा करते रहे हैं कि अमरीका में ज्यादा मामलों की संख्या ज्यादा टेस्टिंग की वजह से हैं. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अमरीका ने कोरोना महामारी का सामना सुपर पावर नहीं बल्कि किसी तीसरी दुनिया के देश की तरह किया है.

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