• यूपी के चुनाव प्रचार में मुस्लिम युवाओं को आगे लायेगी भाजपा

    item-thumbnail  लखनऊ। बीजेपी मुसलमानों की पसंदीदा पार्टी भले न हो, पर यूपी चुनाव में इस बार ऐसे पोस्टरों की भरमार है जिसमें मुस्लिम युवाओं द्वारा बीजेपी को जिताने की अपील की जा रही है, पार्टी की परिवर्तन यात्रा का स्वागत किया जा रहा है। बीजेपी को लेकर मुस्लिम युवाओं का यह रुझान चुनाव को नजदीक से देख रहे लोगों के जहन में दिलचस्पी जगा रहा है। ये मुस्लिम युवा भरोसे के साथ कहते हैं कि अब पार्टी की छवि बदल रही है। सबसे पहले बात मोहसिन रजा की जो टीवी पर बीजेपी का जाना माना मुस्लिम चेहरा बन चुके हैं। तीन राज्यों की ओर से कई रणजी मैच खेल चुके रजा टीवी स्टूडियो में पार्टी का पक्ष रखते हुए देखे जा सकते हैं। क्रिकेट के मैदान में कभी फ्रंट फुट पर जाकर छक्के लगाने वाले रजा ने अब टीवी पर भी खेलना सीख लिया है। रजा के मुताबिक, श्कांग्रेस जैसी पार्टियों ने बीजेपी का डर दिखाकर मुसलमानों को उससे दूर रखा। उसे मुसलमानों के खिलाफ बताया, पर ऐसा बिल्कुल नहीं है। हम दूसरों की तरह वोट बैंक की राजनीति में यकीन नहीं रखते। संयोग से मोहसिन के भाई अर्शी रजा स्थानीय कांग्रेस नेता हैं। 2013 से राजनीति में सक्रिय मोहसिन, बीजेपी के समर्थन में पोस्टर लगाने से चर्चा में आए थे। वह स्वीकार करते हैं कि यह काम उनके लिए आसान नहीं था। मोहसिन ने बताया, मुझे जान से मारने की धमकी मिली, हर तरह के गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ा जिनमें उत्पीड़न से लेकर जमीन कब्जाने तक के आरोप शामिल हैं। मुझे अपने बारे में ऐसी बातों का पता दूसरों से चलता है। बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैदर अब्बास यह स्वीकार करते हैं कि पार्टी में मुसलमानों के प्रति स्थिति बहुत तेजी से बदल रही है। उन्होंने कहा, सबको साथ लेकर चलने की मोदी जी की नीति, बुनकरों के लिए उनकी योजनाओं की वजह से मुस्लिम बीजेपी की तरफ आकर्षित हुए हैं। परिवर्तन यात्रा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें कई मुस्लिम भी शामिल हुए थे। बीजेपी की परिवर्तन यात्रा के दौरान मजहर अब्बास भी एक प्रमुख चेहरे के तौर पर नजर आए थे, जो लखनऊ पश्चिम से बीजेपी का टिकट चाहते हैं। उनके पोस्टर पुराने शहर में जगह-जगह देखे जा सकते थे। शिया कालेज के स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष रह चुके अब्बास, मोहनलालगंज के सांसद के करीबियों में शामिल हैं। 2014 में अब्बास ने अपनी राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी का बीजेपी में विलय कर दिया था। वह कहते हैं, मुझे नहीं पता कि पहले क्या होता था, पर जब से मोदी जी की भूमिका पार्टी में बढ़ी, मुस्लिमों के प्रति सभी तरह के भेदभाव खत्म हो गए हैं। अब्बास के मुताबिक अल्पसंख्यकों में भी अल्पसंख्यक शिया बीजेपी के साथ सुरक्षित महसूस करते हैं। लखनऊ को करीब से जानने और समझने वाले लोगों को बीजेपी के प्रति मुसलमानों के रवैये में यह बदलाव साफ नजर आ रहा है। वैसे तो बीजेपी में कई सुन्नी नेता हैं, पर पार्टी के समर्थन में सबसे ज्यादा मुखर शिया नेता हैं। इसके अलावा बीजेपी उन धर्मगुरु परिवारों को भी अपने साथ लाने में कामयाब रही है जिनका शिया समुदाय पर अच्छा असर माना जाता है। अब्बास के मुताबिक कुछ धर्मगुरु जल्द ही बीजेपी के पक्ष में अपील भी जारी करने वाले हैं। कई बीजेपी नेताओं का दावा है कि पार्टी को खानदान-ए-इज्तिहाद के मौलाना कल्बे जवाद और मौलाना मिर्जा मोहम्मद अतहर के बेटे मौलाना यासूब अब्बास का भी समर्थन हासिल है। अशोका विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्रफेसर अली खान महमूदाबाद कहते हैं, वोट बैंक की राजनीति के खिलाफ होने का दावा करने के बावजूद, बीजेपी भी मुस्लिमों के एक खास तबके को लुभाने में जुटी है।



    Last Updated On: 2017-01-11 20:49:21