• इस दरगाह में होता है चमत्कार, हवा में उठ जाता है 90 kg का पत्थर

    item-thumbnail  हजरत कमर अली दरवेश बाबा की दरगाह पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर मुंबई से 180 किमी दूर शिवपुर गांव में है। यहां 700 साल पहले सूफी संत हजरत कमर अली को दफनाया गया था। हजरत कमर अली एक सूफी थे जिनका निधन 18 साल की उम्र में हो गया था। उन्हें उनकी मृत्यु के पश्चात संत की उपाधि से सम्मानित किया गया था।
     इस दरगाह के परिसर में लगभग 90किलो का पत्थर रखा है। कहते हैं इस पत्थर को यदि 11 लोग सूफी संत का नाम लेते हुए अपनी तर्जनी उंगुली (इंडेक्स फिंगर) से उठाते है तो यह पत्थर आसानी से ऊपर उठ जाता है।लेकिन यह पत्थर दरगाह परिसर से बाहर भी ले जाया जाए तो भी ये आसानी से नहीं उठ सकता। यहां तक कि इस पत्थर को अगर तर्जनी अंगुली के अलावा किसी और उंगुली ये उठाया जाए या 11 से कम लोग उठाएं तो भी ये पत्थर नहीं उठा सकते। ऐसा कहा जाता है कि सूफी कमर अली अपना चमत्कारों के लिए जाने जाते थे। वो अपने बड़े भाई से अलग थे और ताकतवर होने की जगह मेडिटेशन और फास्टिंग में विश्वास रखते थे। जब वो सिर्फ 6 साल के थे उन्होंने सूफी पीर को फॉलो करना स्टार्ट कर दिया था। जल्द ही उनकी चमत्कारिक शक्तियों की वजह से बहुत सारे लोग उनके पास आने लगे। ऐसा कहा जाता है के जहां आज ये दरगाह है वहां 800 साल पहले कसरत करने की जगह हुआ करती थी। कमर अली इन चीजों से कोई लगाव नहीं था और वो प्रूफ करना चाहते थे कि स्पिरिचुअल पावर फिजिकल पावर से ज्यादा होती है। उन्होंने मरने से पहले कहा था कि उनके मरने के बाद एक पत्थर उनकी मजार पर रखा जाए। और उनका नाम लेकर 11 लोग इसे उठाएंगे तो ये पत्थर सिर से भी ऊपर तक उठ जाएगा। उनके मरने के बाद से ऐसा ही हुआ।

     



    Last Updated On: 10-01-17 12:36:12