• अखिलेश को सता रहा डर, कहीं ये दावं न खेल जाएं मुलायम

    item-thumbnail  लखनऊ। उत्तर प्रदेश के चीफ मिनिस्टर अखिलेश यादव को इस बात का डर सता रहा है कि पार्टी तोड़ने की साजिश करने वालों के बहकावे में आकर अगर उनके पिता मुलायम सिंह यादव यूटर्न मार लेते हैं तो विधानसभा की उफनती चुनावी धारा में उनकी नैया बुरी तरह डगमगा सकती है। इसलिए अखिलेश मार्च तक के लिए एसपी के नेशनल प्रेसिडेंट की पोस्ट मुलायम सिंह यादव को नहीं देने पर अड़े हुए हैं। यह बात चीफ मिनिस्टर के एक करीबी सूत्र ने बताई।
     अखिलेश के एक करीबी सूत्र ने पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, 'अखिलेश को अपने पिता पर विश्वास हो या न हो, अमर सिंह जैसे साजिशकर्ताओं पर आगे भी नुकसान पहुंचाने की हरकत करने का पूरा विश्वास है।' उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह के नेशनल प्रेसिडेंट बनने पर मुलायम सिंह से कुछ भी लिखवा लेने की साजिशकर्ताओं में क्षमता है। अखिलेश यह पोस्ट न छोड़कर और किसी भी झांसे में न आकर यह तय करना चाहते हैं कि कैंडिडेट को फॉर्म ए और बी के जरिए पार्टी का निशान अलॉट करने का अधिकार उनके पास रहे।
     सूत्र ने कहा, 'तब क्या होगा, अगर अखिलेश मुलायम के ऑफर पर राजी हो जाते हैं और नैशनल प्रेजिडेंट पोस्ट छोड़ देते हैं और कल को मुलायम साजिशकर्ताओं के बहकावे में आकर कैंडिडेट तय करने का अधिकार उनसे वापस लेने का ऑर्डर जारी कर देते हैं। हम ऐसा होने नहीं दे सकते। अखिलेश यह लिखित में देने को तैयार हैं कि वह चुनाव के बाद पार्टी प्रेजिडेंट की पोस्ट छोड़ देंगे।'
     पार्टी में चल रही खींचतान से बेफिक्र अखिलेश को इस बात का पूरा भरोसा है कि अगर चुनाव आयोग उनकी पार्टी का निशान साइकिल फ्रीज कर देता है तो उनका चेहरा उससे बड़ा निशान होगा। माना जा रहा है कि यूपी के सीएम अखिलेश इसी हफ्ते कांग्रेस पार्टी, अजित सिंह के आरएलडी, आरजेडी और जेडीयू के साथ महागठबंधन कर सकते हैं और सोमवार से चुनाव प्रचार का अभियान शुरू कर सकते हैं।
     दूसरी तरफ मुलायम सिंह यादव ने पार्टी पर अपनी पकड़ में आ रही कमजोरी को भांपते हुए बुधवार को पार्टी कार्यकर्ताओं के एक समूह के सामने इमोशनल कार्ड खेला। मुलायम ने कहा कि उन्होंने अखिलेश के लिए सब कुछ त्याग दिया, यहां तक कि उनको राज्य का अगला सीएम नामित कर दिया। भावनाओं में बहते मुलायम ने यह भी कहा कि जब अखिलेश दो साल के थे, तब वह पहली बार जेल गए थे। मुलायम ने कहा कि उन्होंने पार्टी खड़ी की और उसको मजबूत बनाया।
     मुलायम ने बीजेपी प्रेसिडेंट अमित शाह की तरफ इशारा करते हुए रामगोपाल यादव पर एक विपक्षी दल के प्रेसिडेंट से तीन बार मुलाकात करने और उनके सामने अपने बेटे-बहू को एक सीबीआई केस में बचाने के लिए गिड़गिड़ाने को लेकर हमला बोला। उन्होंने रामगोपाल पर चुनाव आयोग से मोटरसाइकिल का निशान और पार्टी का नया नाम अखिल भारतीय समाजवादी पार्टी मांगने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे पार्टी तोड़ने की साजिश कर रहे हैं जिसको वह कामयाब होने नहीं देंगे।
     मुलायम के करीबी एमएलए ने बताया, 'अखिलेश के कुछ करीबी उनको फुला रहे हैं कि वह मुलायम के बिना चुनाव जीत सकते हैं। अखिलेश को यह नहीं भूलना चाहिए कि कोर यादव वोटर मुलायम की इज्जत करता है और पार्टी टूटने पर उनको ही वोट देगा, जिससे बीजेपी को फायदा हो जाएगा।'



    Last Updated On: 2017-01-12 10:50:27