• 1 जनवरी को शहीद हुए थे कैप्टन मृदुल शर्मा

    item-thumbnail  हमीरपुर। नए साल पर ये कहानी कैप्टन मृदुल शर्मा की बहादुरी, जोश और जज्वे की है। हमीरपुर के सपूत मृदुल ने आज ही दिन साल 2004 में शहादत पाई थी। हमीरपुर में आज उनको याद कर श्रद्धांजलि दी गई।
     हमीरपुर में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल समेत शहर की गणमान्य हस्तियों ने शहीद कैप्टन मृदुल शर्मा पार्क में जाकर उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। 24 फरवरी 1978 को पैदा हुए मृदुल बचपन से ही होनहार थे और देशभक्ति की बातें किया करते थे। हमीरपुर से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने सेना ज्वाइन की और 1999 में अफसर बने थे। शहीद मृदल शर्मा के भाई मुकुल शर्मा ने बताया कि 31 दिसम्बर 2003 को मृदुल शर्मा की बटालियन को सूचना मिली थी कि पीर पंजार रेंज के जंगलों में कुछ आतंकवादी छुपे हुए हैं। अपने साथियों के साथ जब वे मौके पर पहुंचे तो आतंकवादियों ने उन पर गोलियों की बौछार कर दी।
     आतंकवादियों से लोहा लेते हुए मृदुल आगे बढ़ गए। अपने एक साथी को बचाते-बचाते मृदुल के सीने में चार गोलियां लगीं। उन्हें फौरन आर्मी के बेस कैंप में पहुंचाया गया। जख्मी हालत में उन्होंने 1 जनवरी 2004 को आखिरी सांस ली। हर साल उनको श्रद्धांजलि देने के लिए उनकी बटालियन के सैनिक हमीरपुर आते हैं और पार्क में श्रद्धांजलि देते हैं।



    Last Updated On: 2017-01-01 16:44:00